
Ketan Agrawal Murder Case Pune: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में सोमवार को होने वाली सुनवाई से पहले आरोपी सिया गोयल के वकील ने बड़ा बयान दिया है। सिया की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि बचाव पक्ष अदालत में पुलिस रिमांड बढ़ाने का विरोध करेगा। उनका कहना है कि जांच एजेंसी को पहले ही पर्याप्त समय मिल चुका है और अब सिया को न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेजा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल ऐसा कोई कारण नहीं है, जो इस मामले को हत्या करार देता हो। इसके अलावा, जब कोई आरोपी पुलिस की हिरासत में होता है, तो वह दबाव और डर में होता है, ऐसे में उसका कबूलनामा अदालत में मान्य नहीं होता है।
आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि अदालत में उनका पक्ष एफआईआर और अब तक हुई जांच पर आधारित होगा। उन्होंने दावा किया कि सिया गोयल ने पूरे जांच के दौरान पुलिस का पूरा सहयोग किया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को पूछताछ, जानकारी जुटाने और जांच के लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है। ऐसे में अब आगे पुलिस हिरासत बढ़ाने का कोई तार्किक आधार नहीं है।
बचाव पक्ष का कहना है कि अदालत में यह सवाल भी उठाया जाएगा कि आखिर किन परिस्थितियों में जांच एजेंसी ने इस मामले को एक दुर्घटना से हत्या के मामले में बदल दिया।
श्रीवास्तव ने कहा कि बचाव पक्ष के अनुसार फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि यह मामला हत्या का है। इसी आधार पर अदालत से सिया को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की जाएगी ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सके।
एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस हिरासत या पुलिस की मौजूदगी में आरोपी द्वारा दिया गया कथित कबूलनामा अदालत में स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना जाता।
उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष इस कानूनी पहलू को भी अदालत के सामने रखेगा। यदि अभियोजन पक्ष के पास कोई अन्य स्वतंत्र और पुष्ट करने वाले साक्ष्य हैं, तो वह उन्हें बाद के चरण में पेश कर सकता है।
सिया गोयल के वकील ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस ने अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है। ऐसे में यह देखना होगा कि जांच एजेंसी आगे कौन-कौन से ठोस सबूत जुटाती है और अदालत के सामने पेश करती है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल जांच अधूरी है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। बचाव पक्ष उपलब्ध तथ्यों और कानून के आधार पर अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगा।