
अभिजीत दिपके और सुरेश ओबेरॉय (फोटो सोर्स- X/@AMIT_GUJJU)
Suresh Oberoi Lashes On Abhijeet Dipke: अभिनेता विवेक ओबेरॉय के पिता और दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को किसी भी मुद्दे पर बयान देने से पहले पूरी जानकारी हासिल करने और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की सलाह दी। इस दौरान उन्होंने एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर भी सवाल खड़े किए।
सुरेश ओबेरॉय ने 'द निधि शो' में बात करते हुए अपनी बात कही। उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की बातों का लोगों पर असर पड़ता है, इसलिए किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके हर पहलू को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक यह जानना चाहिए कि किसी आंदोलन के पीछे असल मुद्दा क्या है और उसमें शामिल लोग कौन हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य अपनी बात सरकार तक पहुंचाना हो सकता है, लेकिन इसके लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रास्ता अपनाना जरूरी है। उनका मानना है कि सिर्फ सुर्खियों में आने या तुरंत पहचान बनाने के लिए किसी आंदोलन का हिस्सा बनना सही तरीका नहीं है।
सुरेश ओबेरॉय ने अभिजीत दीपके को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हिंसक व्यवहार होता है तो उसे किस तरह का आंदोलन कहा जा सकता है। उन्होंने अभिजीत दीपके का नाम लेते हुए कहा- 'तुम्हारे लोगों ने पुलिस पर हमला किया। इस तरह से थोड़ी प्रदर्शन होता है।'
उनका कहना था कि अपनी मांगों को रखने के लिए देश में कई संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाएं मौजूद हैं। सरकार, अदालत और प्रशासन के स्तर पर अपनी बात रखने के रास्ते हैं। ऐसे में किसी भी विरोध को हिंसा या टकराव की ओर ले जाना उचित नहीं है।
सुरेश ओबेरॉय ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि कलाकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपनी बात सोच-समझकर रखनी चाहिए। उनकी लोकप्रियता के कारण उनकी कही हुई बात बड़ी संख्या में लोग सुनते और देखते हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी मुद्दे पर सिर्फ सोशल मीडिया या विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनने के बजाय पहले तथ्यों को समझना चाहिए। उनका मानना है कि किसी मुद्दे पर राय बनाने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि उसके पीछे कौन से लोग हैं और उनकी वास्तविक मांग क्या है।
सुरेश ओबेरॉय के मुताबिक लोकतंत्र में अपनी मांगों को सामने रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन उस अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। अगर किसी व्यक्ति या समूह को किसी व्यवस्था से शिकायत है तो उसे उचित मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने हिंसा और पुलिस के साथ मारपीट को लेकर साफ तौर पर असहमति जताई। उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखे।
सुरेश ओबेरॉय की ये टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब फिल्म इंडस्ट्री के कुछ कलाकार और एक्टिविस्ट अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते नजर आ रहे हैं। ऐसे में उनके बयान ने एक बार फिर ये बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक हस्तियों को विरोध प्रदर्शनों और संवेदनशील मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते समय कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।
Updated on:
19 Aug 2026 02:06 pm
Published on:
19 Aug 2026 02:02 pm
