
रोहित के. तिवारी
मुंबई. आईआईटी बॉम्बे की एक ताजा रिपोर्ट की माने तो कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए, रोगी की पहचान और आइसोलेटेड की दर को बढ़ाना आवश्यक है। वहीं लॉकडाउन के कारण कोरोना के रोगियों की संख्या को जहां सीमित करना संभव है, वहीं रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई की गई कि लॉकडाउन को हटा दिए जाने पर कोरोना संक्रमण का विस्फोट हो सकता है। आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी गांधीनगर के सहयोग से केंद्रीय जनशक्ति विकास मंत्रालय, आईसीएमआर और विश्व-भारती यूनिवर्सिटी ने 'संक्रामक रोगों के बहुउद्देशीय उपचार' पर एक रिपोर्ट तैयार की है। वहीं यह आंकलन इस रिपोर्ट में दर्ज किया गया है।
निश्चित दर से रोगी की वृद्धि दर बढ़ेगी...
यह रिपोर्ट विभिन्न स्तरों पर अध्ययन करने के बाद लगभग 36 लोगों की एक टीम द्वारा तैयार की गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा रिपोर्ट जारी की गई थी। इस समस्या का अध्ययन करने के लिए जिन तीन विधियों का उपयोग किया जाता है वे हैं 'सिस्टम डायनेमिक मॉडल', 'सॅटस्टिकल मॉडेल' और 'X-SEAIPR मॉडल'। यह विभिन्न अवधियों में विभिन्न स्थितियों पर विचार करने वाले रोगियों की संख्या का गणितीय अध्ययन था। यह सुझाव दिया गया है कि पहले दो तरीकों में लॉकडाउन उठाने के बाद रोगियों की संख्या नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। वहीं तीसरी विधि में, भले ही लॉकडाउन उत्पन्न हो, एक निश्चित दर से रोगी की वृद्धि दर बढ़ेगी। 58 हजार करोड़ रुपये का नुकसान, देश की अर्थव्यवस्था लॉकडाउन के दौरान सबसे कठिन होगी। अगर लॉकडाउन पूरे एक महीने तक जारी रहता है तो देश को लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। तीन सप्ताह के लॉकडाउन में करीब 58 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
भारतीय मॉडल बनाया, लॉकडाउन विकल्प नहीं...
देश में कोविद -19 से लड़ने के लिए विभिन्न समूह अपने स्तर पर मदद कर रहे हैं। लगभग 400 वैज्ञानिकों द्वारा गठित 'रिस्पॉन्स टू कोविद -19' टीम ने महामारी से निपटने के लिए एक भारतीय मॉडल भी विकसित किया है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि लॉकडाउन एकमात्र विकल्प नहीं है, बल्कि परीक्षण बढ़ाने की सलाह दी गई।