मुंबई

मराठी की अनिवार्यता के खिलाफ 15 लाख ऑटो चालकों की हुंकार, 4 मई से पूरे महाराष्ट्र में हड़ताल की चेतावनी

Auto Driver Marathi Protest: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी सेवाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है। मुंबई ऑटो रिक्शा मेन्स यूनियन ने राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है, जिसमें ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया गया है।

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Apr 21, 2026
Devendra Fadnavis Maharashtra
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महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के राज्य सरकार के फैसले ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। राज्य के सबसे बड़े ऑटो यूनियन 'मुंबई रिक्शा मेन्स यूनियन' (Mumbai Autorickshawmen's Union) ने इस फैसले के खिलाफ 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया, तो सड़कों से ऑटो गायब हो सकते हैं।

यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो सड़कों पर ऑटो की कमी हो सकती है और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

15 लाख चालक आंदोलन में उतरेंगे, मुंबई महानगर में दिखेगा सबसे ज्यादा असर

यूनियन के नेताओं के मुताबिक, पूरे महाराष्ट्र में करीब 15 लाख ऑटो चालक इस आंदोलन में शामिल होंगे। इनमें से लगभग 5 लाख चालक मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के हैं।

यूनियन नेता शशांक राव ने कहा, यदि सरकार हमारी अपील को नजरअंदाज करती है, तो हम 4 मई से रेलवे स्टेशनों, बस डिपो और प्रमुख ऑटो स्टैंडों के बाहर आक्रामक विरोध प्रदर्शन करेंगे और यह तब तक प्रतिदिन जारी रहेगा जब तक सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देती।

28 अप्रैल को सरकार को सौंपेंगे ज्ञापन

यूनियन ने सरकार को 28 अप्रैल तक का समय दिया है। इस दिन परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को ज्ञापन सौंपकर 1 मई से लागू होने वाले इस आदेश को वापस लेने की मांग की जाएगी। अगर सरकार ने मांग नहीं मानी, तो 4 मई से आंदोलन और तेज किया जाएगा।

क्या है सरकार का नया नियम?

राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, 1 मई से महाराष्ट्र में लाइसेंसधारी ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता साबित करनी होगी।

यह सत्यापन राज्य के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) में किया जाएगा। परिवहन मंत्री ने साफ किया है कि जो चालक इस शर्त को पूरा नहीं करेंगे, उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

यूनियन का आरोप, केवल ऑटो-टैक्सी चालकों को बनाया जा रहा निशाना

यूनियन नेता शशांक राव ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के पारंपरिक ऑटो और काली-पीली टैक्सी चालकों के साथ भेदभाव कर रही है। यूनियन का दावा है कि मौजूदा चालकों के पास पहले से ही मराठी का कामकाजी ज्ञान है, जो उन्होंने बैच प्राप्त करते समय साबित किया था। ऐसे में अचानक नया नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है।

उनका कहना है कि ओला-उबर जैसे ऐप आधारित कैब ड्राइवरों पर ऐसी कोई सख्ती नहीं है, उन ड्राइवरों के लिए मराठी की कोई अनिवार्यता नहीं है। न ही अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं पर कार्रवाई हो रही है। इसके बावजूद नियमों का पालन करने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों पर ही दबाव डाला जा रहा है।

28 अप्रैल को अल्टीमेटम

महाराष्ट्र में करीब 15 लाख परमिट जारी किए गए हैं, जिससे इतने ही परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। मुंबई में अकेले लगभग 2.8 लाख ऑटो हैं, जबकि पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में यह संख्या करीब 5 लाख तक है। ऐसे में बड़े स्तर पर आंदोलन होने से मुंबई, पुणे, ठाणे और नासिक जैसे शहरों की परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है।

अब सभी की नजर 28 अप्रैल पर टिकी है, जब यूनियन सरकार से बातचीत करेगी। अगर समाधान नहीं निकला, तो मई की शुरुआत में ही महाराष्ट्र की सड़कों पर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।

Updated on:
22 Apr 2026 09:41 am
Published on:
21 Apr 2026 08:00 pm