Maharashtra Mukhyamantri Teerth Darshan Yojana: मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत होते ही इसे वरिष्ठ नागरिकों का जबरदस्त प्रतिसाद मिला था। राज्यभर से हजारों बुजुर्गों ने पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए आवेदन किए थे।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर योजनाओं को लेकर घमासान शुरू होने की उम्मीद है। पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में शुरू की गई महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना' (Mukhyamantri Teerth Darshan Yojana) को लेकर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि शिंदे की इस लोकप्रिय योजना पर ब्रेक लग गया है, जिससे राज्य के हजारों ज्येष्ठ नागरिकों का तीर्थ यात्रा करने का सपना टूटता नजर आ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जालना जैसे जिलों में तो स्थिति यह है कि 'मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना' के हजारों आवेदन धूल फांक रहे हैं, जिससे महायुति सरकार के भीतर आपसी तालमेल की कमी पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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विपक्ष का आरोप है कि एकनाथ शिंदे की घेराबंदी करने के लिए उनके कार्यकाल की 'मेरा स्कूल, सुंदर स्कूल' और 'आनंदाचा शिधा' जैसी योजनाओं के बाद अब इसे भी ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।
योजना की जमीनी हकीकत का अंदाजा जालना जिले के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। यहां इस योजना को जबरदस्त प्रतिसाद मिला और कुल 5,722 बुजुर्गों ने आवेदन किया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 929 आवेदनों को ही मंजूरी मिल पाई है। शेष 4,793 आवेदन अब भी छानबीन की प्रक्रिया में या अधर में फंसे हुए हैं।
जिन 1,239 लाभार्थियों के आवेदन मंजूर हो चुके हैं, वे भी इस इंतजार में हैं कि उन्हें यात्रा के लिए बुलावा कब आएगा। राज्य के अन्य जिलों में भी यही ही स्थिति बनी हुई है। जिससे बुजुर्गों के बीच यह संदेश जा रहा है कि योजना अब लगभग बंद होने के कगार पर है।
महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि शिंदे सरकार के समय की योजनाओं का मुद्दा विपक्ष सदन में उठाएगा और फडणवीस सरकार से जवाब मांग सकता है। शिंदे समर्थकों और महायुति के अन्य घटकों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद की खबरें भी सामने आ रही हैं। अब देखना यह होगा कि क्या फडणवीस सरकार इस योजना को दोबारा गति देती है या फिर यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी। हजारों ज्येष्ठ नागरिकों की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।