
Uddhav Thackeray Shiv Sena Split: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह लोक सभा सांसदों के महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की अटकलों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने बुधवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इस दौरान उन्होंने बागी सांसदों की मीडिया के सामने गाली दी। उन्होंने पत्रकारों से यहां तक कहा कि उनके इस बयान को काटा न जाये। राउत ने कहा कि इन लोगों के खून में बेईमानी आ गई है और यही उनके लिए सही है।
बागी सांसदों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर राज्य सभा सांसद संजय राउत ने कहा, "हम मराठी भाषा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। महाराष्ट्र में यह हमारी आम भाषा है। इसमें गलत क्या है? मुझे अच्छी तरह पता है कि कौन सी भाषा कब इस्तेमाल करनी है। मैं चार दशक से सामना का एडिटर हूं। भाषा का मुझे पूरा ज्ञान है। जो भाषा कोई समझता हो, वही इस्तेमाल करनी चाहिए। मैंने संसद में इस भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है। जो नेता 15 करोड़ रुपये लेकर पार्टी छोड़ दे, उसके बारे में आप क्या कहेंगे? क्या आप उस पर फूल बरसाएंगे?"
हालांकि राउत के इस बयान पर शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "मैं इस तरह की भाषा का समर्थन नहीं करती हूं। लेकिन उनके इमोशन को समझना चाहिए। पहले की पार्टी को तोड़कर नाम और सिंबल एकनाथ शिंदे को दे दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में वो लड़ाई अभी भी जारी है। अब फिर से कोशिश की जा रही है। सभी इसे ऑपरेशन टाइगर कह रहे हैं लेकिन हम इसे ऑपरेशन गद्दारी कहेंगे। ये वोट उद्धव जी के नाम पर था, जनता ने उन पर भरोसा कर इन्हें सांसद बनाया था। आप उसके खिलाफ काम करेंगे तो ये बहुत गलत है। इससे जनता का भरोसा खत्म हो जाएगा। आप इस्तीफा देकर दिखाएं, फिर से चुनाव में जाएं और शिंदे के पार्टी से लड़कर जीतकर दिखा दीजिए। यह जनता के साथ धोका है। क्योंकि उन्होंने पहले हुई बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए उन्हें वोट दिया था।"
दूसरी ओर संजय राउत द्वारा बागी सांसदों के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, "उद्धव गुट के सांसदों में एक असंतोष और नाराजगी है। उनके विधायकों में भी असंतोष है। उनके नेतृत्व के प्रति जो अविश्वास है उसकी वजह से उनमें एक संजय राउत कल तक अपने सांसदों के लिए प्रेम और आदर की भाषा का इस्तेमाल करते थे आज वे सांसदों को गाली देने लगे। कल शाम तक तो उन्होंने अपने सांसदों को बिकाऊ तक कह दिया। आपकी पूरी पार्टी का नेतृत्व खत्म हो चुका है। आपके नेतृत्व में काम करने की क्षमता नहीं है।"
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि ये पहली बार नहीं हो रहा है। नेताओं के साथ आप अच्छा व्यवहार करें। इसी वजह से वे सांसद आपके साथ रहना नहीं चाहते हैं। उन्होंने अलग गुट बनाया है।
शिंदे सेना के वरिष्ठ नेता शिरसाट ने आगे कहा, "संजय राउत ने अभी गाली दी। इस तरीके से लोगों का अपमान करना ठीक नहीं था। ये बहुत दिनों से चल रहा होगा। इसका नतीजा ये निकला होगा कि सांसद उनके साथ नहीं रहना चाहते।"
उद्धव ठाकरे गुट के पास वर्तमान में लोकसभा में नौ सांसद हैं, जिनमें अनिल देसाई, अरविंद सावंत, संजय दीना पाटील, राजाभाऊ वाजे, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटील आष्टीकर, ओमराजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। इसमें से अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे ही उद्धव ठाकरे के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। बुधवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ये तीनों सांसद संजय राउत के साथ मौजूद रहे, जबकि बाकी सांसदों को लेकर लगातार अटकलों का दौर जारी है।