मुंबई

भाजपा को हराने के लिए उद्धव और शिंदे सेना ने मिलाया हाथ, NCP के दोनों गुट भी दे रहे साथ

एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के साथ हाथ मिला लिया है। भाजपा के खिलाफ खुद शिंदे ने इस संयुक्त मोर्चे के समर्थन में प्रचार किया।

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Feb 06, 2026
BJP को पटखनी देने के लिए शिंदे-उद्धव ने मिलाया हाथ (Patrika Photo)

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ा राजनीति उलटफेर देखने को मिल रहा है। सोलापुर के बारशी में भाजपा को हराने के लिए एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों ने गठबंधन किया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद धुर विरोधी उद्धव सेना के साथ मंच साझा कर इस गठबंधन का प्रचार किया।

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BJP के खिलाफ शिवसेना और NCP के दोनों गुट एकजुट

आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए राज्य के धुर विरोधी राजनीतिक गुट एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव की शिवसेना (उबाठा) ने हाथ मिला लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गठबंधन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भी दोनों गुट शरद पवार और अजित पवार शामिल हैं। जबकि शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी अजित पवार गुट भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल हैं, जो राज्य में सत्ता में है।

7 फरवरी को मतदान

सोलापुर की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए शनिवार (7 फरवरी) को चुनाव होने हैं। राज्य स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ तीखी बयानबाजी करने वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों ने स्थानीय स्तर पर 'महा-मोर्चा' बनाकर सभी को हैरान कर दिया है। बारशी तालुका में यह गठबंधन मुख्य रूप से भाजपा के खिलाफ एक मजबूत दीवार खड़ा करने के लिए किया गया है।

शिंदे ने किया प्रचार

बारशी तालुका में बने इस नए गठबंधन को स्थानीय समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस गठबंधन की सबसे बड़ी तस्वीर वैराग में हुई एक चुनावी रैली में दिखी। यहां शिवसेना प्रमुख व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट के साथ मंच साझा किया और इस अनोखे मोर्चे के लिए प्रचार किया। रैली में शिवसेना (उबाठा) के विधायक दिलीप सोपाल भी मौजूद थे।

सियासी गलियारों में चर्चा तेज

हालांकि इस गठबंधन पर स्पष्टीकरण देते हुए शिवसेना (उबाठा) के एक स्थानीय नेता ने बताया कि यह समझौता केवल स्थानीय राजनीति और भाजपा को रोकने तक सीमित है। इसे राज्य स्तर पर किसी स्थायी गठबंधन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

लेकिन बारशी का यह प्रयोग महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो अन्य जिलों में भी भाजपा के खिलाफ ऐसे ही स्थानीय मोर्चे देखने को मिल सकते हैं।

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Published on:
06 Feb 2026 09:03 am
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