BJP victory Satara ZP: एनसीपी और शिवसेना ने भाजपा को रोकने के लिए मिलकर चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन दोनों को भाजपा के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
महाराष्ट्र में सतारा जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में जमकर सियासी ड्रामा देखने को मिला। आखिरी क्षण तक किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, लेकिन अंत में भाजपा (BJP) ने बाजी मारते हुए सत्ता पर कब्जा जमा लिया। शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री शंभुराज देसाई, मकरंद पाटिल और एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे की कड़ी घेराबंदी को तोड़ते हुए भाजपा ने अपना झंडा फहरा दिया। इस कांटे की टक्कर में कोरेगांव के शिवसेना (शिंदे गुट) विधायक महेश शिंदे की पत्नी प्रिया शिंदे को अध्यक्ष चुना गया, जबकि राजू भोसले ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा छूते हुए निर्णायक बढ़त बनाई और अध्यक्ष पद पर प्रिया शिंदे को जीत दिलाई। प्रिया शिंदे को 33 वोट मिले, जबकि उनके मुकाबले में एनसीपी उम्मीदवार मनीषा फडतरे को 32 वोट मिले। महज एक वोट के अंतर से यह चुनाव तय हुआ, जिसने पूरे चुनाव को रोमांचक बना दिया। उपाध्यक्ष पद पर भी भाजपा के राजू भोसले को 33 वोट मिले और उन्होंने जीत हासिल की।
इस जीत के साथ भाजपा ने पर्यटन मंत्री शंभुराज देसाई, राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल और शशिकांत शिंदे जैसे दिग्गज नेताओं को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। यह चुनाव केवल स्थानीय सत्ता का नहीं, बल्कि बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया था।
भाजपा को रोकने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना ने मिलकर चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बनाई थी। राष्ट्रवादी की ओर से मनीषा फडतरे (अध्यक्ष पद) और शिवसेना की ओर से अशोक पाटिल (उपाध्यक्ष पद) ने दावेदारी पेश की, लेकिन दोनों को हार का सामना करना पड़ा।
आखिरी समय तक संघर्ष के बावजूद यह गठबंधन 31-32 के आंकड़े से आगे नहीं बढ़ सका, जबकि बहुमत के लिए 33 सदस्यों की जरूरत थी।
चुनाव से पहले और मतदान के दौरान सदस्य तोड़ने के आरोपों ने माहौल को और ज्यादा गरमा दिया। चर्चा रही कि भाजपा ने एनसीपी और शिवसेना के कुछ सदस्यों को अपने पक्ष में कर लिया, जिससे उसका आंकड़ा बढ़कर 32 तक पहुंच गया।
वहीं विपक्षी खेमे ने आरोप लगाया कि कुछ सदस्यों पर केस दर्ज कर उन्हें दबाव में लेने की कोशिश भी की गई।
मतदान के दौरान जिला परिषद परिसर में भारी हलचल रही। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। सभी प्रमुख दलों के नेता भी मौजूद थे। इस दौरान कुछ सदस्यों को सभागृह तक लाने के दौरान धक्का-मुक्की भी हुई, जिसमें मंत्री शंभुराज देसाई के हाथ में चोट लगने की खबर सामने आई।
बताया जा रहा है कि अपने खेमे के कुछ सदस्यों को सुरक्षित तरीके से सभागृह तक पहुंचाने के लिए देसाई ने खुद मोर्चा संभाला।
65 सदस्यीय जिला परिषद में एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के पास 20, शिवसेना के पास 15, कांग्रेस के पास 1, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के पास 1, भाजपा के पास 27 और एक निर्दलीय सदस्य था। लेकिन चुनाव के समय समीकरण तेजी से बदले और भाजपा ने अपने पक्ष में संख्या बढ़ाते हुए सत्ता हासिल कर ली। इस चुनाव के बाद महायुति के भीतर भी तनाव बढ़ने की चर्चा है। सत्तारूढ़ महायुति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं।