
मराठा आरक्षण आंदोलन (Maratha reservation Andolan) के लिए मनोज जरांगे पाटील अपने हजारों समर्थकों के साथ आज मुंबई पहुंच चुके है। मुंबई से 380 किमी दूर जालना जिले के अपने पैतृक गांव अंतरवाली सराटी से वह बुधवार को रवाना हुए थे। हजारों आज (29 अगस्त) से महाराष्ट्र की राजधानी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि मराठा आरक्षण के लिए यह आखिरी लड़ाई होगी। चाहे जितना भी समय लगे, मुंबई से मराठा नहीं जाएंगे।
एक दिन पहले से ही हजारों की संख्या में मराठा समाज के लोग मुंबई के आजाद मैदान में पहुंचे हैं। आंदोलन के लिए प्रशासन ने पहले ही पांच हजार लोगों की सीमा तय की थी, लेकिन आंदोलन शुरू होने से पहले ही मैदान खचाखच भर गया है। इसके बावजूद और भीड़ लगातार पहुंच रही है। हालात यह हैं कि मैदान से बाहर भी बड़ी संख्या में लोग जमा हो चुके हैं।
इस भारी भीड़ को संभालने के लिए मुंबई पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है। तय सीमा के मुताबिक पहले पांच हजार लोगों को अंदर प्रवेश दिया गया और उसके बाद शेष लोगों को चरणबद्ध तरीके से मैदान के भीतर आने की अनुमति दी जाएगी।
इधर, मराठा आंदोलन का असर मुंबई की सड़क यातायात पर भी साफ दिख रहा है। शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक धीमा पड़ गया है। मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि फ्री-वे का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि फिलहाल इसे आंदोलनकारियों के लिए खाली रखा गया है। पुलिस को आशंका है कि दिनभर शहर में भारी जाम लग सकता है, इसलिए मुंबईवासियों से सहयोग की अपील की गई है।
मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने फ्रीवे पर भारी यातायात के कारण, वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। साथ ही मराठा आंदोलन को ध्यान में रखते हुए लोगों को सलाह दी गई है कि वे सीएसटी और उसके आसपास के इलाकों में जाने से बचें।
मराठा समाज का यह प्रदर्शन आरक्षण की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहे आंदोलन की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। मनोज जरांगे की मुख्य मांग है कि मराठा समाज को कुनबी जाति की मान्यता दी जाए, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल है। ऐसा होने पर मराठा समाज को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।