
Mumbai Cyber Fraud: मुंबई में एक रिटायर्ड कर्मचारी से ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 6.81 करोड़ रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले की जांच कर रही दक्षिण साइबर क्राइम शाखा ने इस धोखाधड़ी में कथित रूप से शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, ठगों ने पीड़ित को एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करने के लिए प्रेरित किया। वेबसाइट पर पीड़ित को दिखाया गया कि उसका निवेश और मुनाफा बढ़कर 149 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी लालच में वह लगातार रकम निवेश करता रहा, लेकिन बाद में उसे एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गया है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने 11 अप्रैल से 27 मई के बीच कुल 48 अलग-अलग ट्रांजेक्शन किये और कुल 6.81 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दयानंद कोलेकर (31), धनंजय सागवेकर (36) और सुक्रुत भोसले (33) के रूप में हुई है। कोलेकर और भोसले कांदिवली पश्चिम के बांदर पाखडी क्षेत्र के निवासी हैं, जबकि सागवेकर जोगेश्वरी में रहता है।
जांच में पता चला कि पीड़ित के ठगे गए पैसों में से 76 लाख रुपये उन बैंक खातों में पहुंचे थे, जिनका संबंध गिरफ्तार आरोपियों से था। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को शेयर बाजार में भारी रिटर्न का वादा कर पहले 35 लाख रुपये और फिर 15 लाख रुपये दो अलग-अलग निजी बैंक खातों से एक खाते में ट्रांसफर करवाए गए।
जब पुलिस ने संबंधित बैंक खाते की जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह खाता 'मैसर्स अलुवंता ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी के नाम पर पंजीकृत था। इस कंपनी के निदेशक दयानंद कोलेकर और धनंजय सागवेकर बताए गए।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इसी कंपनी के एक अन्य खाते में भी 26 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने दोनों निदेशकों को गिरफ्तार कर लिया।
तीसरे आरोपी सुक्रुत भोसले पर आरोप है कि उसने इन दोनों की फर्जी कंपनियां खोलने और बैंक खाते संचालित करने में मदद की थी।
पुलिस जब कंपनी के पंजीकृत पते पर पहुंची तो कार्यालय बंद मिला। जांच में पता चला कि इस नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य आरोपी राजस्थान फरार हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, फरार आरोपियों के खिलाफ पहले से करीब 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस उनकी तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी कर रही है।
इस मामले में 28 मई को दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं के अलावा आईटी एक्ट के तहत पहचान की चोरी समेत विभिन्न गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में साइबर क्राइम टीम पूरे मामले की जांच कर रही है।