मुंबई

मुंबई मेट्रो की डिजाइन में बड़ी चूक! 260 करोड़ का काम खतरे में, 1 KM वायाडक्ट तोड़ने की आ सकती है नौबत

Mumbai Metro Design Error: Mumbai Metro Line 7A में एयरपोर्ट के पास ऊंचाई को लेकर तकनीकी समस्या सामने आई है। करीब 250-260 करोड़ रुपए के काम पर असर पड़ सकता है और मंजूरी नहीं मिलने पर लगभग 1 किलोमीटर के वायाडक्ट में बदलाव या दोबारा निर्माण की नौबत आ सकती है।
2 min read
Aug 31, 2026
Mumbai Metro News
मुंबई मेट्रो लाइन 7A के एयरपोर्ट के पास बने वायाडक्ट की ऊंचाई को लेकर सामने आई तकनीकी समस्या। (फोटो सोर्स-@TheUrbanAcres )

Mumbai Metro News:मुंबई में मेट्रो लाइन 7A के निर्माण को लेकर एक बड़ी तकनीकी परेशानी सामने आई है। एयरपोर्ट के पास बनाया गया करीब 1 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड हिस्सा अब सवालों के घेरे में है। वजह मेट्रो के बिजली के तार और उपकरण लगाने के लिए जरूरी ऊंचाई है, जो एयरपोर्ट की तय सुरक्षा सीमा से ज्यादा बताई जा रही है।

अगर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जरूरी मंजूरी नहीं मिली और कोई दूसरा तकनीकी रास्ता नहीं निकला, तो बने हुए हिस्से में तोड़फोड़ कर उसे दोबारा बनाने की जरूरत पड़ सकती है। इससे करीब 250 से 260 करोड़ रुपए के काम पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि वायाडक्ट को तोड़ा ही जाएगा।

एयरपोर्ट के पास कहां फंसा मामला?

यह मामला मुंबई के विले पार्ले ईस्ट के एयरपोर्ट कॉलोनी इलाके का है। यह क्षेत्र एयरपोर्ट के उस हिस्से में आता है जहां विमानों की सुरक्षित आवाजाही को देखते हुए ऊंचे निर्माण को लेकर सख्त नियम लागू होते हैं।

MMRDA के मुताबिक, मेट्रो लाइन के डिजाइन और तकनीकी योजना तैयार करने वाली SYSTRA-CEG-SMCIPL टीम से OHE यानी मेट्रो को बिजली पहुंचाने वाले सिस्टम की अतिरिक्त ऊंचाई को लेकर चूक हुई। शुरुआत में एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से परियोजना को NOC मिली थी, लेकिन बाद में OHE की ऊंचाई का मुद्दा सामने आया। यह समस्या वर्ष 2025 में सामने आई, जिसके बाद इस हिस्से का काम रोक दिया गया।

तब तक करोड़ों का काम हो चुका था

समस्या सामने आने तक मेट्रो का निर्माण काफी आगे बढ़ चुका था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फरवरी 2026 तक प्रभावित एलिवेटेड वायाडक्ट का काम पूरा हो चुका था। एलिवेटेड रैंप का करीब 95 फीसदी काम भी हो गया था और एयरपोर्ट कॉलोनी स्टेशन का निर्माण भी काफी आगे बढ़ चुका था।

यही वजह है कि अब मामला ज्यादा गंभीर हो गया है। अगर ऊंचाई की समस्या का कोई हल नहीं निकलता है तो पहले से बने ढांचे में बदलाव या दोबारा निर्माण करना पड़ सकता है।

सिर्फ ढांचा नीचे करना भी आसान नहीं

आम तौर पर सवाल उठ सकता है कि अगर ऊंचाई ज्यादा है तो वायाडक्ट को नीचे क्यों नहीं कर दिया जाता? लेकिन मेट्रो लाइन में ऐसा करना इतना आसान नहीं होता। ट्रैक की ढलान, ट्रेन की गति और आगे-पीछे की लाइन से जुड़ाव को ध्यान में रखकर पूरी संरचना तैयार की जाती है। ऐसे में किसी हिस्से को अचानक नीचे करने से पूरी लाइन की डिजाइन प्रभावित हो सकती है।

अब AAI की रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल MMRDA, AAI की अंतिम तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। कोशिश है कि सुरक्षा नियमों से समझौता किए बिना कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे पहले से बने ढांचे को बचाया जा सके।

करीब 3.4 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन 7A अंधेरी ईस्ट को मुंबई एयरपोर्ट से जोड़ने वाली अहम परियोजना है। इसे आगे मेट्रो लाइन 3 से भी जोड़ा जाना है। परियोजना पहले ही देरी का सामना कर रही है।

अब सबकी नजर AAI के फैसले पर है। अगर अतिरिक्त ऊंचाई को मंजूरी नहीं मिली और कोई तकनीकी समाधान नहीं निकला, तो करीब 1 किलोमीटर के हिस्से में बदलाव या दोबारा निर्माण की नौबत आ सकती है। इसका असर प्रोजेक्ट की लागत और समयसीमा, दोनों पर पड़ सकता है।