
महाराष्ट्र के फंसे लोगों की घर वापसी के लिए सरकार ने कसी कमर, फडणवीस ने दिए सख्त निर्देश (Photo: IANS)
Nepal Flash Floods:नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या 900 तक पहुंच गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों परिवार अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं। कई इलाकों में लगातार बढ़ते पानी और खराब परिस्थितियों के कारण राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन में फंसे राज्य के नागरिकों की मदद एवं सुरक्षित निकासी के लिए सरकारी एजेंसियां 24 घंटे काम कर रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और समन्वय सुनिश्चित करें, ताकि प्रभावित सभी लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।
इस बीच सबसे बड़ी चिंता महाराष्ट्र के 67 तीर्थयात्रियों को लेकर है, जो नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद से लापता हैं। ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे। उनके परिवार लगातार अधिकारियों से संपर्क कर अपने प्रियजनों की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र के ये 67 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इनमें मुंबई के कांदिवली निवासी 60 वर्षीय मीनाक्षी सुब्रमण्यम और उनके 67 वर्षीय पति वेंकटा सुब्रमण्यम भी शामिल हैं। यह समूह डॉक्टर मिलिंद चितले के नेतृत्व में यात्रा कर रहा था। बाढ़ आने के समय यात्री टिमुरे बॉर्डर इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे और वहां से तिब्बत जाने की तैयारी कर रहे थे। इसके बाद से समूह के सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाया है। उनका आखिरी ज्ञात ठिकाना रासुवा जिले का टिमुरे बताया जा रहा है, जो कि इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है।
मुंबई के रामकृष्णन परिवार के लिए यह इंतजार बेहद मुश्किल हो गया है। परिवार के सदस्य सीजी रामकृष्णन ने बताया कि उन्हें सुबह 8.21 बजे अपने बहनोई वेंकटा का मैसेज मिला था। उन्होंने बताया कि मैसेज में लिखा था कि वे नेपाल के इमिग्रेशन सेंटर में हैं और तिब्बत की ओर जाने वाले हैं। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है। रामकृष्णन ने बताया कि परिवार भारतीय, नेपाली और चीनी दूतावासों के लगातार संपर्क में है, लेकिन अभी तक 67 लोगों के ठिकाने या उनकी स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
परिवार के मुताबिक, लापता लोगों के मोबाइल फोन बंद हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। रामकृष्णन ने बताया कि दूतावासों से मिली जानकारी के अनुसार रासुवा फ्लैश फ्लड का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार अपने प्रियजनों को लेकर बेहद चिंतित है। अधिकारियों की ओर से तलाश जारी है, लेकिन समय बीतने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है।
लापता मीनाक्षी के भाई रामकृष्णन ने भावुक होकर कहा, "प्रशासन उनकी तलाश में जुटा है, लेकिन उनके जिंदा बचने की संभावनाएं बहुत कम दिख रही हैं और हमारी उम्मीदें टूट रही हैं। फिर भी हम प्रार्थना करते हैं कि हमारी आशंकाएं गलत साबित हों और कोई चमत्कार हो जाए।"
इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को बताया कि राज्य के 69 नागरिक चीन के कोडारी इमिग्रेशन सेंटर से नेपाल की ओर रवाना हुए हैं और उनके सोमवार तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले महाराष्ट्र के 142 पर्यटकों को सुरक्षित राज्य में वापस लाया जा चुका है। नेपाल में बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद कई इलाकों में शव बरामद किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से ऐसे शवों से जुड़े पहचान संबंधी सबूतों को सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि आगे चलकर उनकी पहचान की जा सके और परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी हो सके।
वहीं, कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने से राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। पांच दिन बाद भी हजारों परिवार अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और महाराष्ट्र के 67 तीर्थयात्रियों को लेकर भी परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
Updated on:
31 Aug 2026, 3:34 PM IST
Published on:
31 Aug 2026, 2:33 PM IST
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