
Nana Patekar 1993 Mumbai Blast: अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनसे जुड़े पुराने किस्से और यादें फिर से चर्चा में हैं। अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर असल जिंदगी में भी संवेदनशील इंसान थे। करीब 33 साल पहले सातारा में उन्होंने ऐसा काम किया था, जिसे आज भी लोग याद करते हैं। 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के पीड़ितों की मदद के लिए नाना पाटेकर सड़क पर उतरे थे और कंधे पर झोली लटकाकर लोगों से आर्थिक सहायता जुटाई थी।
मुंबई में हुए बम धमाकों में कई लोगों की जान चली गई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। महाराष्ट्र टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों की मदद के लिए सातारा के सामाजिक संगठन ‘सातारा जेसीस’ ने सहायता राशि जुटाने के लिए एक अभियान चलाया। इस अभियान में नाना पाटेकर के साथ तत्कालीन कांग्रेस नेता मदन भोसले भी शामिल हुए थे। सातारा के राजवाड़ा इलाके, पोवई नाका और मुख्य बाजार से गुजरते हुए लोगों से मदद मांगी गई।
इस अभियान के दौरान नाना पाटेकर ने लोगों से आगे आकर बम धमाकों में घायल हुए लोगों की मदद करने की अपील की। उनकी आवाज पर आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक ने अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहायता दी। सातारा की सड़कों पर निकली इस मदद फेरी को आज भी वहां के लोग एक भावुक और यादगार घटना के रूप में याद करते हैं।
फेरी राजपथ से खुली जीप में निकाली गई थी। जब जीप मोती चौक स्थित ‘चरणसेवा’ दुकान के पास पहुंची, तो नाना पाटेकर ने आवाज लगाई, ‘देवा, बाहर आइए और मदद कीजिए।’ उनकी आवाज सुनकर दुकान के मालिक और सातारा के पूर्व नगरसेवक अच्युतराव उर्फ देवा जाधव बाहर आए। उन्होंने अपनी जेब से पैसे निकालकर नाना की झोली में डाल दिए।
इस अभियान का एक दिलचस्प किस्सा सातारा पुलिस मुख्यालय के पास सामने आया। जब मदद फेरी वहां पहुंची, तो नाना पाटेकर जीप से उतरे और शहर के पुलिस थाने में चले गए। उन्होंने वहां मौजूद अधिकारी से भी बम धमाकों के पीड़ितों के लिए आर्थिक मदद मांगी। अधिकारी ने उन्हें सहायता राशि दी। सातारा जेसीस के तत्कालीन अध्यक्ष दत्ता भोसले और प्रोफेसर विलास गवली के मुताबिक, पुलिस थाने से बाहर निकलते समय नाना पाटेकर ने मजाकिया अंदाज में कहा था, ‘लोग यहां पैसे देते हैं, मैं पैसे लेकर आया।’ उनका यह अंदाज उस अभियान की यादों में आज भी दर्ज है।
नाना पाटेकर के इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होने के पीछे उनकी निजी जिंदगी का दर्द भी जुड़ा था। बताया जाता है कि 1993 के मुंबई बम धमाकों में उन्होंने अपने भाई को खो दिया था। उनका भाई जिस बस में सफर कर रहा था, उसी बस में विस्फोट हुआ था। धमाका इतना भीषण था कि शव की पहचान करना मुश्किल हो गया था। नाना के भाई की पहचान उनके हाथ में पहने ब्रेसलेट की मदद से हो सकी थी।
बताया जाता है कि नाना की पत्नी नीलकांति भी उसी समय दूसरी बस से सफर कर रही थीं। दोनों को एक ही बस में जाना था, लेकिन सीट सिर्फ एक ही उपलब्ध थी। ऐसे में नाना के भाई को दूसरी बस में बैठना पड़ा, जो बाद में धमाके की चपेट में आ गई। अपने परिवार पर आई इस त्रासदी के बावजूद नाना पाटेकर ने दूसरे पीड़ितों की मदद के लिए आगे बढ़कर योगदान दिया। सातारा में झोली लेकर सहायता जुटाने की उनकी यह घटना आज भी लोगों को उनके मानवीय पक्ष की याद दिलाती है।