8 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘नाना, आप मुझसे प्यार करते थे ना’, याद कर भावुक हुए विश्वास नांगरे पाटिल; बोले- पुलिस के लिए लोहे की तरह खड़े रहते थे

Nana Patekar Death; नाना पाटेकर के निधन से भावुक हुए विश्वास नांगरे पाटिल ने फेसबुक पर पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि नाना पुलिस के लिए लोहे की तरह खड़े रहते थे और किसानों के लिए हमेशा आवाज उठाते थे।
3 min read
Google source verification

मुंबई

•

image

Imran Ansari

•

Oct 08, 2026

Nana Patekar Death

नाना को याद कर भावुक हुए विश्वास नांगरे पाटिल, फोटो सोर्स- ANI

Nana Patekar News: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत के साथ-साथ उनके चाहने वालों में भी शोक की लहर है। 75 साल की उम्र में हृदयाघात के चलते नाना पाटेकर के निधन की खबर ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। उनके निधन पर नागपुर जिला पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल ने भी सोशल मीडिया पर भावुक श्रद्धांजलि दी और नाना से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं।

विश्वास नांगरे पाटिल ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पुराना समाचार चैनल का वीडियो साझा किया। इस वीडियो के जरिए उन्होंने नाना पाटेकर के साथ अपने रिश्ते और उनसे जुड़ी कुछ यादों को याद किया। नाना को याद करते हुए नांगरे पाटिल भावुक नजर आए।

‘नाना, आप मुझसे प्यार करते थे ना…’

विश्वास नांगरे पाटिल ने अपनी पोस्ट में नाना पाटेकर के लिए बेहद भावुक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि नाना पुलिस के लिए हमेशा मजबूती से खड़े रहते थे। उन्होंने नाना को निडर और किसानों का हितैषी बताते हुए कहा कि उनके अचानक चले जाने की खबर पर विश्वास करना मुश्किल है। नांगरे पाटिल ने लिखा कि नाना से कुछ ही समय पहले उनकी बातचीत हुई थी और अगले दिन वह मुंबई में नागपुर पुलिस के लिए एक रिकॉर्डिंग करने वाले थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने भावुक होकर नाना को याद करते हुए कहा कि वह पुलिस के लिए 'लोहे की तरह खड़े रहते थे”। उन्होंने नाना के व्यक्तित्व को बेबाक, निडर और मजबूत बताते हुए उनके अचानक निधन पर गहरा दुख जताया।

किसानों के लिए भी हमेशा उठाई आवाज

नाना पाटेकर सिर्फ अपनी फिल्मों और अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों के लिए भी जाने जाते थे। किसानों की समस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता और मदद के प्रयासों ने उन्हें लोगों के बीच अलग पहचान दिलाई। इसी सामाजिक जुड़ाव के चलते उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए किसानों और ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए काम किया। नांगरे पाटिल ने भी अपनी श्रद्धांजलि में नाना को किसानों का रक्षक बताते हुए उनके सामाजिक योगदान को याद किया।

मुरुड से शुरू हुआ था सफर

नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा क्षेत्र में हुआ था। छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर मराठी और हिंदी सिनेमा में अलग मुकाम बनाया। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ दिनकरराव पाटेकर था। शुरुआती जीवन में परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने संघर्ष किया। बाद में मुंबई का रुख किया, जहां उनकी कलात्मक प्रतिभा को नई दिशा मिली। बताया जाता है कि बचपन से ही उन्हें कला और नाटक में रुचि थी। उनके पिता को भी नाटकों और सांस्कृतिक गतिविधियों में दिलचस्पी थी, जिसका प्रभाव नाना के व्यक्तित्व पर पड़ा। धीरे-धीरे रंगमंच से उनका जुड़ाव बढ़ा और यही सफर आगे चलकर उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में शामिल करने वाला साबित हुआ।

चित्रकला से अभिनय तक का सफर

नाना पाटेकर ने मुंबई के सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में पढ़ाई की। उन्हें चित्रकला में भी गहरी रुचि थी, लेकिन रंगमंच और अभिनय ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। अपनी दमदार आवाज, चेहरे के भाव और संवाद अदायगी की अलग शैली के कारण नाना ने फिल्मों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए और दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।

नाना के निधन से उनके जन्मस्थान मुरुड-जंजीरा सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में शोक का माहौल है। उनके प्रशंसक और परिचित सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें और यादें साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं, विश्वास नांगरे पाटिल की भावुक पोस्ट ने नाना के साथ उनके आत्मीय संबंधों और अभिनेता के मानवीय पक्ष को एक बार फिर सामने ला दिया है।

बड़ी खबरें

View All

मुंबई

महाराष्ट्र न्यूज़

ट्रेंडिंग