मुंबई नगर निगम (BMC) के हालिया चुनाव नतीजे भाजपा गठबंधन के लिए ऐतिहासिक साबित हुए हैं। लगभग तीन दशकों से बीएमसी पर चले आ रहे ठाकरे परिवार के वर्चस्व को खत्म कर दिया है।
मुंबई महानगरपालिका (BMC) में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपनी ताकत बढ़ाते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के नवनिर्वाचित नगरसेवकों को अपने खेमे में शामिल कर लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई में अजित पवार नीत एनसीपी के तीन नगरसेवक और शरद पवार गुट का एक नगरसेवक (पार्षद) आधिकारिक रूप से शिंदे गुट के साथ जुड़ने की तैयारी में है। इन चारों को मिलाकर अब बीएमसी में एक संयुक्त विधायी समूह का गठन किया जा रहा है।
इस नए राजनीतिक समीकरण के तहत महायुति गठबंधन बीएमसी में दो अलग-अलग समूहों के रूप में खुद को पंजीकृत करेगा। जिमें भाजपा (BJP) अपना स्वतंत्र समूह बनाएगी, जबकि शिंदे की शिवसेना, एनसीपी (अजित पवार गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नगरसेवकों को साथ मिलाकर संयुक्त समूह के रूप में पंजीकरण कराएगी।
इस फेरबदल के बाद बीएमसी में शिंदे सेना की संख्या 29 से बढ़कर 33 हो जाएगी। शिवसेना खेमे के पार्षदों की संख्या बढ़ने से बीएमसी में नेतृत्व और अहम फैसलों पर उसका दबदबा और मजबूत होगा। वहीं, महायुति गठबंधन की कुल ताकत अब 122 नगरसेवकों तक पहुंच गई है।
बीएमसी में शिवसेना (शिंदे गुट) के बढ़ते कुनबे ने गठबंधन की साथी भाजपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पार्षदों की संख्या में इस इजाफे के बाद बीएमसी के नीतिगत फैसलों और नेतृत्व पर शिंदे गुट का प्रभाव पहले से अधिक मजबूत हो जाएगा। दरअसल, बीएमसी मेयर पद और स्थायी समिति जैसी महत्वपूर्ण समितियों में उचित प्रतिनिधित्व को लेकर दोनों दलों के बीच पहले से ही खींचतान चल रही है। अब बढ़ी हुई ताकत के दम पर शिंदे सेना अपनी दावेदारी को और अधिक आक्रामक तरीके से पेश कर सकती है, जो भाजपा के एकतरफा वर्चस्व के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी।
मुंबई बीएमसी चुनाव का इस बार का जनादेश भाजपा गठबंधन के लिए ऐतिहासिक रहा है। लगभग तीन दशकों से चली आ रही ठाकरे परिवार की पकड़ को तोड़ते हुए महायुति ने बड़ी जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति को कुल 118 सीटें मिलीं, जिनमें से अकेले भाजपा ने 90 सीटों पर जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा पाया। शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं।
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के लिए यह चुनाव निराशाजनक साबित हुआ। पार्टी को 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि पिछले चुनाव में वह 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। वहीं, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे को महज छह सीटें ही मिल सकीं, जबकि उसने उद्धव सेना के साथ गठबंधन कर 53 सीटों पर चुनाव लड़ा था।