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Mumbai: गैंगरेप के आरोप में 12 साल जेल में काटे, अब कोर्ट ने कहा- दुष्कर्म हुआ यह साबित नहीं हो रहा

Mumbai Crime: मुंबई की विशेष पॉक्सो अदालत ने 12 साल से जेल में बंद 35 वर्षीय आरोपी को नाबालिग से गैंगरेप के आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, जिसके चलते आरोपी को राहत दी गई।
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Apr 26, 2026
Crime News
प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार के आरोपी 35 वर्षीय व्यक्ति को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला तब आया है जब आरोपी पहले ही 12 साल जेल की सजा काट चुका है। कोर्ट ने फैसले के दौरान पीड़िता की उम्र पर संदेह, मेडिकल साक्ष्यों की कमी और FIR दर्ज करने में हुई देरी को मुख्य आधार माना। विशेष न्यायाधीश एन. डी. खोसे ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है।

अदालत ने अपने फैसले में सबसे पहले पीड़िता की उम्र को लेकर गंभीर सवाल उठाए। रिकॉर्ड में जहां जन्मतिथि 4 मार्च 2003 बताई गई, वहीं मेडिकल रिपोर्ट में यह 4 मई 1993 दर्ज थी। कोर्ट ने कहा कि जब तक संबंधित प्राधिकरण की पुष्टि नहीं होती, तब तक उम्र को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

मेडिकल सबूतों ने नहीं किया आरोपों की पुष्टि

मामले में मेडिकल साक्ष्य भी अभियोजन के दावों को मजबूत नहीं कर सके। डॉक्टर ने गवाही में बताया कि हाइमन का फटना कई गैर-यौन कारणों से भी हो सकता है और यह पता करना संभव नहीं है कि यह कब और कैसे हुआ। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल हाइमन का फटना यौन संबंध का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब शरीर पर अन्य कोई चोट या फॉरेंसिक साक्ष्य मौजूद न हों।

FIR में देरी पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इस मामले में शिकायत दर्ज करने में दो दिन की देरी हुई थी, जिसे लेकर अदालत ने गंभीर आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि इतनी देरी और उसका कोई स्पष्ट कारण न होना इस बात की ओर संकेत करता है कि शिकायत बाद में सोच-समझकर दर्ज कराई गई हो सकती है। साथ ही, पीड़िता की मां ने यह भी स्वीकार किया कि पड़ोसियों के कहने पर शिकायत दर्ज की गई, जिससे मामले की स्वाभाविकता पर सवाल खड़े हुए।

आरोप साबित करने में रहा नाकाम

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी और उसके साथियों ने नवंबर 2014 से पहले एक महीने तक अलग-अलग समय पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। सबूतों की कमी और विरोधाभासों के कारण आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया।

क्या है मामला?

यह मामला 2014 का है, जब दहिसर पूर्व के एक घर में पीड़िता के साथ बार-बार दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया था। पीड़िता की मां के अनुसार, लड़की को पेट दर्द की शिकायत थी, जिसे पहले नजरअंदाज किया गया। 31 अक्टूबर 2014 को लड़की घर से गायब मिली और बाद में आरोपी के घर पर पाई गई।

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी और उसके साथियों ने उसे अश्लील वीडियो दिखाकर धमकाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

Updated on:
26 Apr 2026 03:47 pm
Published on:
26 Apr 2026 03:47 pm