
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का मनसे प्रमुख राज ठाकरे के घर गणपति दर्शन के लिए नहीं पहुंचना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने इस बार राज ठाकरे के दादर स्थित 'शिवतीर्थ' आवास पर गणपति दर्शन नहीं किया। इसकी एक वजह राज ठाकरे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर हालिया टिप्पणियों को बताया जा रहा है।
दरअसल, 14 सितंबर को नवी मुंबई में हिंदी दिवस और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान अमित शाह ने महाराष्ट्र की बहुभाषिक संस्कृति का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में मराठी के साथ कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली जैसी भाषाओं का विकास और सम्मान हुआ है।
इसके बाद राज ठाकरे ने बिना अमित शाह का नाम लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, “कौए के श्राप से गाय नहीं मरती।” इस पोस्ट को शाह की टिप्पणी पर कटाक्ष के रूप में देखा गया।
राज ठाकरे की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि किसी के पूरे भाषण को सुने बिना प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। उन्होंने राज ठाकरे पर “चुनिंदा बातें सुनने और उसी आधार पर प्रतिक्रिया देने” का आरोप लगाया।
फडणवीस ने कहा कि अमित शाह ने अपने भाषण में मराठी भाषा की प्रमुखता और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया था। उन्होंने मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की जरूरत पर भी बात की और महाराष्ट्र की बहुभाषिक संस्कृति का जिक्र किया था। फडणवीस ने कहा कि बहुभाषिक होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की मातृभाषा या पहचान बदल जाती है।
फडणवीस ने कहा कि बहुभाषी होने का मतलब यह नहीं है कि आपकी मातृभाषा बदल जाती है। मैं खुद कई भाषाएं बोलता हूं, लेकिन मेरी मातृभाषा मराठी है। मैं मराठी हूं और मराठी ही रहूंगा, मेरी यह पहचान कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह द्वारा मराठी की तारीफ में कहे गए शब्दों को जानबूझकर ठाकरे ने नजरअंदाज किया ताकि राजनीतिक हमला करने का मौका मिल सके।
राज ठाकरे और सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन के बीच तनाव की चर्चा के पीछे एक अन्य हालिया घटनाक्रम भी है। अगस्त के अंत में मनसे नेता और राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे के पुणे के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाए जाने को लेकर विवाद हुआ था।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, प्रिंसिपल के कार्यालय में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तस्वीरों के साथ लगी थी। आरोप है कि अमित ठाकरे के साथ पहुंचे मनसे कार्यकर्ताओं ने तस्वीर हटाई। इस मामले में अमित ठाकरे और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कुछ मनसे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया था।
अमित ठाकरे ने इस कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रखा था और इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान से जुड़ा मामला बताया था। बाद में राज ठाकरे ने भी कहा था कि सरकारी कार्यालय में प्रधानमंत्री की तस्वीर होनी चाहिए, लेकिन शिवाजी महाराज, डॉ. आंबेडकर और महात्मा फुले जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों की तस्वीरों के साथ उसे एक ही पंक्ति में रखना सही नहीं है।
पिछले कुछ वर्षों से राज ठाकरे के घर गणपति दर्शन के लिए फडणवीस और शिंदे जाते रहे हैं, लेकिन इस बार उनके नहीं जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं हैं। इसे राज ठाकरे और भाजपा नेतृत्व के बीच हालिया तीखी बयानबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अब तक इसके कारण के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गौर करने वाली बात यह है कि गणेशोत्सव के दौरान 14 सितंबर को अमित शाह ने फडणवीस के सरकारी आवास 'वर्षा' पर भी गणपति दर्शन किया था। इस दौरान फडणवीस और शिंदे भी मौजूद थे।