मुंबई

हिंदी के बाद अब गुजराती से परेशानी! राज ठाकरे की मनसे ने होटल मालिक को दी चेतावनी

Raj Thackeray MNS: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मुंबई के कांदिवली इलाके में एक होटल के गुजराती साइनबोर्ड पर आपत्ति जताते हुए उसे बदलने की चेतावनी दी।
2 min read
• •
Updated: 10 Apr 2026, 1:04 PM IST
Raj Thackeray MNS Marathi Row
राज ठाकरे की मनसे ने होटल मालिक को दी चेतावनी (Photo: X/IANS)

मुंबई में मराठी भाषा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अब गुजराती भाषा के साइनबोर्ड के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ताजा मामला मुंबई के कांदिवली इलाके का है, जहां मनसे की चेतावनी के बाद एक भोजनालय को अपना गुजराती साइनबोर्ड हटाकर उसकी जगह मराठी बोर्ड लगाना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

कांदिवली के चारकोप इलाके में स्थित एक भोजनालय ने अपना नाम और अन्य जानकारी गुजराती भाषा में लिखी थी। यह भोजनालय मुख्य रूप से चाट व अन्य नाश्ते परोसने के लिए इलाके में लोकप्रिय है। इस गुजराती साइनबोर्ड की तस्वीरें वायरल हो रही थीं, जिसके बाद स्थानीय मनसे पदाधिकारी उदय कोंडविलकर और अन्य कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया।

मंगलवार को मनसे कार्यकर्ताओं ने भोजनालय के मालिक से मुलाकात की और उन्हें एक पत्र सौंपकर 7 दिनों के भीतर साइनबोर्ड बदलने का अल्टीमेटम दिया। हालांकि, मनसे की इस चेतावनी के बाद होटल मालिक ने अगले ही दिन गुजराती बोर्ड हटाकर मराठी में नया साइनबोर्ड लगा दिया।

मनसे नेता उदय कोंडविलकर ने बताया कि उन्हें इस बारे में शिकायतें मिल रही थीं। उन्होंने कहा, भोजनालय ने अपना साइनबोर्ड पूरी तरह गुजराती में लगाया था। हमने उसके मालिक से मुलाकात कर मराठी भाषा में साइनबोर्ड लगाने के लिए कहा। उन्होंने हमारी बात मान ली और साइनबोर्ड अगले ही दिन बदल दिया।

क्या कहता है नियम?

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नियमों के अनुसार, मुंबई में सभी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अपने नाम मराठी (देवनागरी लिपि) में प्रदर्शित करना अनिवार्य है। यदि साइनबोर्ड पर एक से अधिक भाषाओं का उपयोग किया गया है, तो मराठी अक्षरों का आकार किसी भी अन्य भाषा के अक्षरों से छोटा नहीं होना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का प्रावधान है।

बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीति में राज ठाकरे और मनसे शुरू से ही 'मराठी मानुष' और 'भूमिपुत्र' के मुद्दे को लेकर आक्रामक रही है। राज ठाकरे का साफ कहना है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा ही सर्वोच्च होनी चाहिए। अक्सर अपने भाषणों में वे इस बात पर जोर देते हैं कि उत्तर भारतीयों के प्रभाव के कारण मराठी भाषा और संस्कृति हाशिए पर जा रही है।

अतीत में मनसे कार्यकर्ताओं ने कई बार हिंदी में लगे साइनबोर्ड्स को काला करने, रेलवे भर्ती परीक्षाओं में हिंदी भाषी उम्मीदवारों का विरोध करने, बैंकों-स्कूलों में मराठी अनिवार्य करने जैसे मुद्दों को लेकर उग्र आंदोलन किए हैं। राज ठाकरे का तर्क है कि यदि कोई महाराष्ट्र में रह रहा है, व्यवसाय कर रहा है, तो उसे यहां की मूल भाषा मराठी आनी ही चाहिए। हिंदी की तरह ही गुजराती, मारवाड़ी भाषा को लेकर भी मनसे का रुख 'मराठी फर्स्ट' वाला रहा है।

Updated on:
10 Apr 2026, 1:04 PM IST
Published on: