महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी (सपा) की अंदरूनी खींचतान अब खुले तौर पर सामने आ गई है और मामला सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंच गया है। भिवंडी से सपा विधायक रईस शेख पर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ बगावत करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। भिवंडी पूर्व से सपा विधायक रईस कासम शेख ने प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिसके बाद अब समाजवादी पार्टी की मुंबई ईकाई ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक विस्तृत पत्र लिखकर शेख के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए है। इस पत्र में रईस शेख पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC Election) में विपक्षी दलों के साथ साठगांठ करने के सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब रईस शेख ने अखिलेश यादव को पत्र लिखकर महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पार्टी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाई जा रही है और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
रईस शेख के आरोपों के जवाब में मुंबई सपा द्वारा अखिलेश यादव को पत्र लिखा गया और शेख पर गंभीर आरोप लगाए गए। पत्र में कहा गया है कि 2019 में जब रईस शेख पहली बार सपा के विधायक बने। इसके बाद उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के संगठन की जिम्मेदारी की मांग प्रदेश अध्यक्ष से की, लेकिन इसे अमान्य कर दिया गया। लेकिन वरिष्ठ नेताओं के कहने पर उनके विधानसभा क्षेत्र भिवंडी पूर्व के संगठन की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई। उन्होंने पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया।
पार्टी ने आरोप लगाया है कि सन 2024 में पार्टी ने रईस कासम शेख को दोबारा अवसर दिया और दूसरी बार भी वे समाजवादी पार्टी के विधायक के रूप में चुने गए। जब वे दूसरी बार विधायक बने, तो वे अपने विधानसभा क्षेत्र के संगठन के साथ-साथ निकट भविष्य में होने वाले महानगरपालिका चुनाव के टिकट वितरण सहित पूरे चुनाव की जिम्मेदारी की मांग करने लगे।
लेकिन प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी के हितों को ध्यान में रखते हुए आगामी महानगरपालिका चुनाव के लिए समन्वय समिति स्थापित की और पार्टी हित में निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी। इस समिति के गठन के बाद रईस शेख ने समिति की सभी बैठकों में हिस्सा लिया। प्रत्याशियों के चयन में वे सक्रिय रहे।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि टिकट वितरण के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने एक समन्वय समिति बनाई थी ताकि चयन निष्पक्ष हो सके। पत्र में दावा किया गया है कि 30 दिसंबर को पर्चा दाखिल करने की अंतिम दिन से दो दिन पहले 28 दिसंबर की शाम से ही विधायक के रुख में आश्चर्यजनक परिवर्तन हुआ और उन्होंने पार्टी के संभावित प्रत्याशियों से सपा का ए-बी फार्म लेकर उसे खराब किया और कांग्रेस व एनसीपी के साथ षड्यंत्र रचने लगे। उन्होंने पार्टी के मजबूत उम्मीदवारों को कांग्रेस और एनसीपी से टिकट दिलाने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया।
सपा की मुंबई ईकाई की तरफ से जारी पत्र में कहा गया कि मुंबई के जिन वार्डों 136 और 211 से रईस शेख पहले नगरसेवक रह चुके हैं, वहां उन्होंने सपा प्रत्याशियों के बजाय कांग्रेस और एमआईएम के उम्मीदवारों का समर्थन किया। उन्हें कांग्रेस का टिकट दिलवाकर पार्टी के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।
15 जनवरी को होने वाले महानगरपालिका चुनाव से पहले महाराष्ट्र सपा के लिए यह विवाद बड़ा झटका साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें अखिलेश यादव के फैसले पर टिकी हैं।