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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मामला: ‘सत्तारूढ़ दलों को चंदा देते हैं ठेकेदार, इसलिए सरकार बचा रही है’, रोहित पवार ने शिंदे-फडणवीस सरकार को घेरा

Mumbai Pune Expressway: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट पर सियासी घमासान तेज हो गया है। रोहित पवार ने सरकार पर ठेकेदारों को बचाने और चंदे के बदले क्लीन चिट देने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए परियोजना का बचाव किया।
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Jul 11, 2026
Missing Link Project
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मामले में रोहित पवार ने शिंदे-फडणवीस सरकार को घेरा। फोटो सोर्स-IANS

Mumbai Pune Expressway landslide:मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है। एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रोहित पवार का कहना है कि सरकार उन बड़ी कंपनियों और ठेकेदारों को बचा रही है, जो इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि ये ठेकेदार सत्ताधारी दलों को भारी-भरकम चंदा (फंड) देते हैं।

'नेता और ठेकेदारों का तगड़ा गठजोड़'

रोहित पवार ने कहा कि इस पूरे मामले के पीछे नेताओं और ठेकेदारों का एक बड़ा नेक्सस (गठजोड़) काम कर रहा है। हाल ही में भारी बारिश के बाद प्रोजेक्ट साइट के पास भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ था, जिससे सड़कों पर दरारें आ गईं। पवार ने कहा कि नवयुग और एफकॉन्स जैसी बड़ी कंपनियों को जवाबदेही से बचाया जा रहा है। सरकार उन्हें सिर्फ इसलिए क्लीन चिट दे रही है, क्योंकि उनसे सत्ता पक्ष को मोटा फंड मिलता है। बता दें कि इस हफ्ते की शुरुआत में सुरंग के पास लैंडस्लाइड होने से सड़क और रेल यातायात दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

राम मंदिर जमीन विवाद और महाकुंभ पर भी घेरा

रोहित पवार सिर्फ एक्सप्रेसवे पर ही नहीं रुके, उन्होंने सरकार को अन्य मुद्दों पर भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने राम मंदिर डोनेशन केस में कथित वित्तीय अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग की। पवार ने कहा कि हम 1,500 करोड़ रुपए के राम मंदिर जमीन घोटाले की न्यायिक जांच और नासिक महाकुंभ के 34,000 करोड़ रुपए के कामों के ऑडिट की मांग करते हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर लगाए जा रहे काउंटर आरोप सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल हैं।

एथेनॉल पॉलिसी पर उठाए सवाल

रोहित पवार ने केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुरानी गाड़ियों में 20 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल मिक्स ईंधन का इस्तेमाल करने से इंजनों को तकनीकी नुकसान होगा। जब तक भारत में बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल कारें नहीं आ जातीं, तब तक 100% एथेनॉल व्यावहारिक नहीं है।
हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि यह फैसला ऑटोमोबाइल कंपनियों और विशेषज्ञों से लंबी चर्चा के बाद ही लिया गया है और पुरानी गाड़ियों में इसके इस्तेमाल से अभी तक किसी बड़े नुकसान की रिपोर्ट नहीं आई है।

देवेंद्र फडणवीस का तीखा पलटवार

दूसरी तरफ, सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इस प्रोजेक्ट का बचाव किया। उन्होंने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि जनता का पैसा पानी में बह गया है। फडणवीस ने आलोचना करने वालों पर तंज कसते हुए पहले 'भाड़े के टट्टू' शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसे बाद में उन्होंने 'भटका गर्दभ' और 'सुपारीबाज' जैसे शब्दों से बदला।

फडणवीस ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को फेल बताना और यह कहना कि '7,000 करोड़ रुपए डूब गए', महाराष्ट्र का अपमान है। उन्होंने इसे इंजीनियरिंग की एक बड़ी कामयाबी बताया, जिससे घाट वाले इलाके में एक्सीडेंट कम हुए हैं।

Updated on:
11 Jul 2026 02:53 pm
Published on:
11 Jul 2026 02:53 pm
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