
Sachin Ahir joins Shinde Sena: महाराष्ट्र की राजनीति में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' जारी है। उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों को अपने पाले में करने के बाद शिंदे ने उद्धव को एक और बड़ा सियासी झटका दिया है। ठाकरे के विश्वसनीय माने जाने वाले विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने शिवसेना का दामन थाम लिया है। उन्होंने न सिर्फ पाला बदला, बल्कि भाजपा नीत सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की ओर से विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल विधान परिषद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मुंबई के सबसे चर्चित विधानसभा क्षेत्रों में शामिल वर्ली की राजनीति पर भी पड़ सकता है, जहां से आदित्य ठाकरे विधायक हैं।
सचिन अहीर का राजनीतिक सफर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से शुरू हुआ था। वह पार्टी के मुंबई अध्यक्ष भी रह चुके हैं और राज्य सरकार में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 1999 से 2019 तक वह एनसीपी में रहे, जिसके बाद शिवसेना में शामिल हो गए। शिवसेना में विभाजन के बाद भी उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ा था और उन्हें ठाकरे के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था।
वर्ली को उनका मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। वे यहां से दो बार विधायक भी रह चुके हैं और श्रमिक संगठनों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों, विशेषकर मछुआरा कोली समाज के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
जब आदित्य ठाकरे ने पहली बार वर्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब सचिन अहीर ने इस सीट पर अपना दावा नहीं किया था। उन्होंने आदित्य ठाकरे के पक्ष में चुनावी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी तरह शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुनील शिंदे ने भी वर्ली सीट आदित्य ठाकरे के लिए छोड़ी थी।
अब सचिन अहीर के शिंदे गुट के साथ जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं कि इससे वर्ली में शिवसेना (UBT) के संगठन और स्थानीय समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, भविष्य में इसका वास्तविक असर कितना होगा, यह चुनावी परिणामों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
सचिन अहीर अंडरवर्ल्ड डॉन 'डैडी' यानी अरुण गवली के भतीजे है। हालांकि, अहीर की राजनीतिक पहचान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठनात्मक कार्यों के आधार पर बनी है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि भविष्य के विधानसभा चुनाव में महायुति, यदि वर्ली सीट पर आदित्य ठाकरे के खिलाफ मजबूत चेहरा उतारने की रणनीति बनाती है, तो सचिन अहीर का नाम प्रमुख दावेदारों में हो सकता है।
वर्ली विधानसभा सीट फिलहाल आदित्य ठाकरे के पास है। अब तक बीजेपी या शिंदे गुट के पास वर्ली में ऐसा कोई स्थानीय चेहरा नहीं था जो आदित्य को सीधी टक्कर दे सके और स्थानीय वोट बैंक में सेंध लगा सके। लेकिन अब सचिन अहीर के आने से वह कमी पूरी हो गई है। सचिन अहीर के सहारे महायुति अब वर्ली में आदित्य ठाकरे की घेराबंदी करने और उनके लिए विधानसभा की राह मुश्किल करने की पूरी तैयारी में है।
हालांकि, इस संबंध में महायुति के किसी भी दल की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।