
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (Photo: IANS)
Eknath Shinde Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद अब 'ऑपरेशन टाइगर-3' को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अब ठाकरे गुट के करीब 14 विधायक शिंदे गुट के संपर्क में हैं और उन्हें साथ लाने की तैयारी चल रही है।
हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न ही शिवसेना (UBT) और न ही शिंदे गुट की ओर से 14 विधायकों के पाला बदलने की खबरों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। लेकिन शिंदे खेमे के नेता यह भी कहने से नहीं चूक रहें हैं कि 'ऑपरेशन टाइगर' हमेशा जारी रहता है।
ठाणे जिले के कद्दावर शिवसेना (शिंदे गुट) नेता व राज्य सरकार में मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल में बड़ा बयान देते हुए कहा था कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ साल के 365 दिन और 24 घंटे चलता रहता है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई में अगर कोई शिवसैनिक काम करना चाहता है तो हमारे दरवाजे 24 घंटे खुले हैं। ऑपरेशन टाइगर साल के 365 दिन, 24 घंटे चलता है। कोई भी शिव सैनिक जो बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा में विश्वास रखता है और एकनाथ शिंदे की लीडरशिप पर भरोसा करता है, उसके लिए हमारे दरवाजे हमेशा खुले हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस राजनीतिक अभियान की तैयारियां ठाणे से बेहद गोपनीय तरीके से संचालित की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि यदि विधायक टूटते है तो उन्हें कानूनी अड़चनों से बचाने के लिए जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। इतना ही नहीं, संभावित विधायकों को कुछ दिनों तक सुरक्षित और अज्ञात स्थान पर रखने, उनकी सुरक्षा समेत सारी व्यवस्था का भी खाका तैयार किया गया है। यह जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भरोसेमंद सहयोगियों को सौंपी गई है।
हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र से पहले शिवसेना (UBT) के छह सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए थे। इसके बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता का दावा किया था।
उधर, उद्धव ठाकरे इन सांसदों के संसदीय क्षेत्रों में लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। इसी बीच अब पार्टी के विधायकों के टूटने की चर्चाओं ने महाराष्ट्र का सियासी पारा और बढ़ा दिया है।
पिछले हफ्ते शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी छोड़ने की अफवाहों के बीच अपनी पार्टी को एकजुट रखने के लिए सभी विधायकों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी के कुल 26 विधायकों (20 एमएलए और 6 एमएलसी) में से 22 विधायक बैठक में मौजूद थे। चार विधायक संजय देरकर, राहुल पाटिल और संजय पोटनिस (एमएलए) तथा सुनील शिंदे (एमएलसी) बैठक में शामिल नहीं हुए। इस पर पार्टी की तरफ से बताया गया कि इन विधायकों ने निजी कामों, स्थानीय धार्मिक कार्यक्रमों और हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव (MLC) के नतीजों से जुड़े कामों के कारण नेतृत्व से पहले ही अनुपस्थिति की अनुमति ली थी।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पिछले सप्ताह कुछ विधायकों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। इसके बाद इस कथित अभियान को और गति मिलने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि 8 जुलाई के आसपास इस पूरे घटनाक्रम का निर्णायक चरण सामने आ सकता है। यदि ऐसा होता है तो महाराष्ट्र की सत्ता और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी चल रही है कि यदि यह कथित अभियान सफल होता है तो राज्य की राजनीति में शिंदे गुट की ताकत और बढ़ सकती है। इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
बता दें कि 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था। शिंदे की बगावत के बाद अविभाजित शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी और महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी। तब उद्धव ठाकरे को पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह और अधिकांश नेता गंवाने पड़े थे। शिंदे के साथ 55 में से 40 से अधिक विधायक चले गए थे। उद्धव नीत एमवीए सरकार के गिरने के बाद भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने थे। यह बगावत सिर्फ विधायकों तक सीमित नहीं रही। 12 शिवसेना सांसद भी शिंदे खेमे में चले गए थे। इसके बाद दूसरा बड़ा झटका इसी महीने लगा जब शिवसेना उद्धव गुट के लोक सभा के 9 में से 6 सांसद पाला बदलकर शिंदे सेना में शामिल हो गए। अगर अब 14 विधायक टूटते हैं तो यह उद्धव ठाकरे के लिए चार वर्षों में तीसरा बड़ा राजनीतिक झटका होगा।
Published on:
29 Jun 2026 01:06 pm
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