
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में चार वर्षों के भीतर दूसरी बार बड़ी राजनीतिक टूट देखने को मिली है। पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों द्वारा अलग राह अपनाने के फैसले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, बागी सांसदों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) ने उन पर जोरदार हमला बोलना शुरू कर दिया है।
पार्टी के सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने बागी सांसदों को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह कोई वैचारिक बगावत नहीं, बल्कि खुद को बेचने का मामला है। उन्होंने दावा किया कि इन सांसदों के बीच केंद्रीय मंत्री पद को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है और देर रात इस पर कोई समझौता कराया गया।
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा कि वह इस घटनाक्रम को पार्टी में फूट नहीं मानते। उन्होंने कहा, "कोई व्यक्ति विचारधारा के लिए पार्टी छोड़ता है तो उसे फूट कहा जा सकता है, लेकिन जब कोई खुद को बाजार में बेचने के लिए खड़ा कर दे और कोई उसे खरीद ले, तो उसे फूट नहीं बल्कि सौदा कहा जाता है।"
राउत ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले पार्टी के 6 सांसदों ने खुद को राजनीतिक बाजार में पेश किया और फिर उनकी बोली लगाकर उन्हें खरीद लिया गया। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने किसी बड़े सिद्धांत या विचारधारा के लिए पार्टी नहीं छोड़ी है।
संजय राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों के बीच मंत्री पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। उनके मुताबिक, सभी सांसद मंत्री बनना चाहते हैं, जिस कारण आपसी विवाद पैदा हुआ। हालांकि, उन्होंने कहा कि देर रात इस विवाद का कोई मध्यस्थ समाधान निकाल लिया गया।