
Form 6 Controversy: चुनाव आयोग के फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर विवाद और तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उनके खिलाफ संसद में महाभियोग लाने की बात कही है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए संजय राउत ने दावा किया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर ही ज्ञानेश कुमार की तानाशाही के खिलाफ बगावत हो चुकी है। उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। राउत ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में ऐसा बदलाव किया गया है, जिसमें नए मतदाताओं से उनके माता-पिता और दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।
राउत ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लोकसभा तथा राज्यसभा में सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर राउत ने सवाल उठाते हुए कहा कि नए मतदाताओं से उनके पूर्वजों के पुराने मतदाता रिकॉर्ड के बारे में क्यों पूछा जा रहा है। उन्होंने इसी संदर्भ में ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या उनके दादा और परदादा उस पुराने मतदाता रिकॉर्ड में थे।
राउत का यह बयान फॉर्म-6 में जोड़े गए नए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े घोषणा-पत्र के संदर्भ में आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए मतदाताओं से पूछा गया है कि क्या उनका नाम पिछली एसआईआर (SIR) के दौरान तैयार मतदाता सूची में था, क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था, अथवा इनमें से किसी का नाम नहीं था।
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट के बाद हुई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीने में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज की। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सरकार के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए भी कई आरोप लगाए और कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। राउत ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग भी की है। राउत ने बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के चुनावों को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि इन राज्यों में चुनाव दोबारा कराए जाने चाहिए।
राउत ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार संवैधानिक पद पर बैठे माफिया की तरह काम कर रहे हैं। वे गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहे हैं और उनके 'छोटा शकील' बनकर लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं।
संजय राउत ने कहा कि मौजूदा चुनाव आयोग 'लोकतंत्र का कत्लखाना' बन चुका है। देश को बचाने के लिए अब सभी विपक्षी दलों को एक साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना होगा।
तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में दो आयुक्तों की कथित आपत्तियों ने आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है। रिपोर्टों में फॉर्म-6 के अलावा मतदाता नाम हटाने, अपीलों और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने बताया कि सभी मामलों पर अंतिम निर्णय आयोग ने सामूहिक रूप से लिए हैं।
इस बीच, संजय राउत ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में महाभियोग लाने की बात कही है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक बर्खास्तगी से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत CEC को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों से विशेष प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव पारित होना और उसके आधार पर राष्ट्रपति का आदेश जरूरी होता है।