
Ramesh Mhatre Dombivli Doctor Assault Case: डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों से मारपीट मामले में एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। अदालत ने म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों को तीन दिनों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे। अदालत ने सुनवाई के दौरान डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने म्हात्रे के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या का भी उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि ऐसे आपराधिक मामलों की पृष्ठभूमि वाले नेता के जमानत पर बाहर रहने की स्थिति में निष्पक्ष मुकदमा कैसे चल पाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान शिवसेना पार्षद के वकील से तीखे सवाल पूछे। पीठ ने आरोपी रमेश म्हात्रे के आपराधिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए पूछा कि जिसके खिलाफ पहले से ही 19 मामले दर्ज हैं, अगर ऐसा नेता जमानत पर बाहर रहेगा तो मामले का निष्पक्ष मुकदमा कैसे संभव है? क्या ऐसे में गवाह बिना किसी डर के अदालत के सामने आकर अपनी गवाही दे पाएंगे?
हालांकि बचाव पक्ष ने दलील दी कि ये सभी मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और उन्हें इनमें से 18 मामलों में बरी किया जा चुका है। साथ ही मुख्य मामले में भी गवाहों की सुनवाई प्रक्रिया चल रही है। लेकिन शीर्ष अदालत ने अपराध की गंभीरता और समाज में जाने वाले संदेश को प्राथमिकता देते हुए जमानत रद्द कर दी।
यह घटना 6 जुलाई को ठाणे जिले में कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) द्वारा संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में हुई थी। एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर विवाद शुरू हुआ था। अस्पताल के डॉक्टरों ने नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी।
इससे नाराज परिजनों ने स्थानीय शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को बुलाया। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद म्हात्रे और उनके समर्थकों ने डॉक्टरों तथा अस्पताल कर्मचारियों के साथ बहस की और फिर उनके साथ मारपीट की।
इस मामले में म्हात्रे को गिरफ्तार किया गया था। 14 जुलाई को निचली अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए निचली अदालत के जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी। बाद में 7 अगस्त को हाई कोर्ट ने म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी थी। साथ ही हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई तेजी से पूरा करने का निर्देश भी दिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और शिवसेना नेता की जमानत रद्द करने की मांग की।
महाराष्ट्र सरकार ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 7 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने म्हात्रे से जवाब मांगा था और जमानत रद्द करने की राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए आज 28 सितंबर की तारीख तय की थी।
आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों और डॉक्टरों की सुरक्षा पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि डॉक्टर और मेडिकल कर्मचारी जनसेवा करते हैं और समाज में यह संदेश दूर-दूर तक जाना चाहिए कि उनके साथ मारपीट स्वीकार्य नहीं है।
फिलहाल इस मामले में पुलिस पहले ही आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इस मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया लंबित है।