
Uddhav Thackeray Omraje Nimbalkar: महाराष्ट्र के धाराशिव (उस्मानाबाद) के कद्दावर नेता व बागी माने जा रहे शिवसेना (यूबीटी) सांसद ओमराजे निंबालकर को मनाने की कोशिशें ठाकरे गुट ने तेज कर दी है। दरअसल ओमराजे के पिता पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले में 20 साल बाद अदालत का फैसला आया और सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। पूर्व कांग्रेस नेता पवनराजे की हत्या मामले में एनसीपी प्रमुख व महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के भाई पद्मसिंह पाटिल भी आरोपी थे।
निंबालकर परिवार के खिलाफ यह निर्णय आने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। संजय राउत ने पहले दावा किया था कि यदि ओमराजे निंबालकर शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो उनके पक्ष में अदालत का फैसला सुनाया जाएगा। लेकिन अदालत के फैसले के बाद स्थिति अलग दिशा में जाती दिखाई दे रही है।
इस बीच, शनिवार देर रात ठाकरे गुट के नेता कैलास पाटिल और वरुण सरदेसाई पुणे में ओमराजे निंबालकर के निवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब एक घंटे तक उनसे चर्चा की। इस दौरान भविष्य की राजनीतिक रणनीति और मौजूदा हालात पर बातचीत हुई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने भी ओमराजे निंबालकर से फोन पर बातचीत की और उनकी राजनीतिक भूमिका जानने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इस बातचीत में ओमराजे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है और वे फिलहाल ठाकरे गुट के साथ हैं।
बताया जा रहा है कि ओमराजे ने उद्धव ठाकरे से कहा, आज मैं जो भी हूं, पार्टी और आपके कारण हूं। आपने मुझे आगे बढ़ाया है। मैंने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। किसी भी निर्णय से पहले मैं अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से चर्चा करूंगा।
18 जून को शिवसेना ठाकरे गुट ने दिल्ली में अपने संसदीय दल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक के लिए पार्टी की ओर से सभी सांसदों के लिए बकायदा 'व्हिप' भी जारी किया गया था। लेकिन इसके बावजूद लोकसभा के कुल नौ सांसदों में से केवल तीन सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही उपस्थित रहे। दूसरी तरफ, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल समेत कुल छह सांसद इस बैठक से गैरहाजिर रहे।
पिछले हफ्ते बगावत का बिगुल फूंकने वाले उद्धव गुट के 6 सांसदों में संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) शामिल है।
यदि इन छह सांसदों में से कोई एक सांसद भी अपना फैसला बदलकर उद्धव ठाकरे के साथ बना रहता है, तो बाकी बागी सांसदों के लिए अलग गुट बनाकर शिवसेना (शिंदे गुट) में विलय करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी स्थिति में उनका दावा कमजोर पड़ सकता है और दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है। उनकी सांसदी भी छिन सकती है।