
Kanwar Yatra 2026: सावन के पवित्र महीने में जहां लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा कर रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस में तैनात हेड कांस्टेबल अमित उर्फ 'मिट्ठू मंदेरिया' अपनी अनोखी जिम थीम वाली कांवड़ को लेकर चर्चा में हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली के नजफगढ़ स्थित शिव मंदिर तक की यात्रा कर रहे अमित इस यात्रा को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि इसे युवाओं में फिटनेस और नशामुक्ति का संदेश फैलाने का माध्यम भी बना रहे हैं।
मंगलवार रात जब अमित अपने साथियों के साथ मुजफ्फरनगर के शिव चौक पहुंचे तो उनकी विशेष कांवड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट गए। श्रद्धालुओं ने उनके साथ तस्वीरें और वीडियो बनाए, जबकि सोशल मीडिया पर भी उनकी 'जिम थीम' वाली कांवड़ तेजी से चर्चा का विषय बन गई।
यात्रा के दौरान अमित और उनकी टीम जगह-जगह रुककर युवाओं को पुश-अप, स्क्वाट और अन्य आसान व्यायाम करवाती है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को उनकी क्षमता के अनुसार पुरस्कार देकर प्रोत्साहित भी किया जाता है। उनके साथ यात्रा कर रहे दो नन्हे शिवभक्त भी लगातार व्यायाम कर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
करीब 250 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में अमित अपनी टीम के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली पहुंचेंगे। अब तक वे लगभग 75 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। उनकी कांवड़ को मिनी जिम का रूप दिया गया है। आगे भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित है, जबकि पीछे डंबल और अन्य जिम उपकरण लगाए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि अमित इस भारी कांवड़ को मोटी लोहे की चेन से बांधकर नंदी की तरह खींचते हुए यात्रा कर रहे हैं।
अमित का मानना है कि आज बड़ी संख्या में युवा नशे की लत के कारण अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता खो रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने कांवड़ यात्रा को फिटनेस जागरूकता अभियान का स्वरूप दिया है। उनका संदेश है कि शरीर को मंदिर की तरह स्वस्थ रखें और यदि किसी चीज का जुनून पालना है तो वह फिटनेस का होना चाहिए।
दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल के रूप में कार्यरत अमित राष्ट्रीय स्तर के तैराक भी रह चुके हैं। 40 वर्षीय अमित का कहना है कि उन्होंने आज तक किसी भी प्रकार का नशा नहीं किया। उनका कहना है कि पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने कई युवाओं को नशे की लत में बर्बाद होते देखा है। इसी अनुभव ने उन्हें समाज में स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। अमित ने कांवड़ यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि बिना शारीरिक तैयारी के अधिक वजन वाली कांवड़ न उठाएं।
उन्होंने कहा कि पहले नियमित व्यायाम के जरिए शरीर को सक्षम बनाएं और फिर अपनी क्षमता के अनुसार कांवड़ यात्रा करें। उनके अनुसार कांवड़ यात्रा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और शारीरिक क्षमता की भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा है।