Nagauri Ashwagandha: नागौर में जीआई टैग मिलने के बाद पहली बार बजट में ‘नागौरी अश्वगंधा’ को वैश्विक ब्रांड बनाने की दिशा में ठोस घोषणाएं की गई हैं।
नागौर। राजस्थान बजट 2026-27 में ‘नागौरी अश्वगंधा’ को लेकर की गई विशेष घोषणा ने जिले के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। जनवरी 2026 में नागौरी वेलफेयर सोसायटी, अमरपुरा के माध्यम से इस औषधीय फसल को आधिकारिक तौर पर जीआई टैग मिलने के बाद यह पहला बजट है, जिसमें इसे वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की ठोस रणनीति सामने आई है।
सरकार ने नागौरी अश्वगंधा के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष ‘निर्यात प्रोत्साहन सेल’ गठित करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य स्थानीय किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सीधे अंतरराष्ट्रीय फार्मा व आयुर्वेदिक कंपनियों से जोड़ना है। इससे बिचौलियों की भूमिका घटेगी और उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर नागौर और जोधपुर में अश्वगंधा की सफाई, ग्रेडिंग और पाउडर निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपए की लागत से प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। एफपीओ को इन इकाइयों की स्थापना पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग होने से परिवहन लागत घटेगी और किसानों को मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।
सरकार ने अपनी प्रमुख ‘घर-घर औषधि योजना’ में उच्च गुणवत्ता वाली नागौरी अश्वगंधा को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। प्रत्येक परिवार को वितरित किए जाने वाले पौधों में इसे शामिल किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर मांग बढ़ेगी और आमजन में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
जीआई टैग मिलने के बाद सरकार ने व्यापार को सुगम बनाने के लिए बड़े फैसले लिए हैं।
जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर के माध्यम से नागौरी अश्वगंधा के औषधीय तत्वों पर विशेष शोध के लिए अतिरिक्त बजट दिया गया है। साथ ही नागौर जिले में ‘अश्वगंधा बीज बैंक’ स्थापित किया जाएगा, जिससे किसानों को प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो सकें।
बजट दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि जीआई टैग मिलने से अब नागौर के बाहर उगाई गई अश्वगंधा को ‘नागौरी अश्वगंधा’ के नाम से नहीं बेचा जा सकेगा। इससे मिलावट पर रोक लगेगी और असली उत्पाद की पहचान मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक मूल्य मिलना संभव है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इन घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया गया, तो नागौर देश में औषधीय फसलों का प्रमुख निर्यात केंद्र बन सकता है। नागौरी अश्वगंधा अब केवल एक फसल नहीं, बल्कि जिले की नई आर्थिक पहचान बनने की ओर बढ़ रही है।
नागौरी वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष पारुल चौधरी के प्रयासों से मिली इस उपलब्धि को अब सरकारी नीतिगत समर्थन भी मिल गया है। बजट में घोषित योजनाओं के लागू होने पर नागौर के किसानों को 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक दाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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