नागौर

पॉलीथिन पर नहीं लग रहा अंकुश, दुकानदार व ग्राहक धड़ल्ले से कर रहे उपयोग

कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदार कर रहे खानापूर्ति

2 min read
Oct 28, 2017
Do not lock at polyethylene in nagaur

कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
नागौर. शहर में लगभग हर जगह पॉलीथिन का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। चाहे गांधी चौक की सब्जी मंडी हो या सुगनसिंह सर्किल, रोडवेज बस स्टैण्ड हो या रेलवे स्टेशन, हर दुकान व ठेले पर पॉलीथिन उपयोग की जा रही है। पॉलीथिन पर प्रतिबंध होने के बावजूद इसका उपयोग खुलेआम हो रहा है। जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी किस प्रकार निभा रहे हैं, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में पिछले दो माह में एक बार कार्रवाई हुई और उसमें भी मात्र आठ किलो पॉलीथिन जब्त की। अधिकारियों द्वारा खानापूर्ति के लिए अभियान चलाया जाता है, लेकिन मात्र दस-बारह दिनों बाद उसकी हवा निकल जाती है।

यह पड़ रहा प्रभाव

ये भी पढ़ें

नई इबारत से लिखी जा रही है 80 बच्चों की तकदीर

पॉलीथिन का बुरा प्रभाव इंसानों के स्वास्थय के साथ पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। कभी नष्ट नहीं होने वाला पॉलीथिन ग्राउण्ड वाटर को भी नुकसान पहुंचा रहा है। साथ ही हानिकारक गैसें जैसे बेंजीन, क्लोराइड, विनायल, इथनॉल, ऑकराइड से वायु प्रदूषण भी फैलाता है, लेकिन जागरुकता की कमी के चलते पॉलीथिन के उपयोग को नहीं रोक पा रहे है। पॉलीथिन को लेकर कड़ी कार्रवाई नहीं होने व जनता में जागरुकता की कमी के चलते पॉलीथिन उपयोग दिनों दिन बढ़ रहा है।

गलाने से गलता तक नहीं
प्लास्टिक के कप में चाय या दूध पीने से ग्लास का केमिकल मुंह के अंदर चला जाता है, जिससे डायरिया व गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। यह गत्ते, कपड़े, कागज की तरह नहीं होता, बल्कि यह न तो गलाने से गलता है और ना ही जलाने से जलता है।

बना लिया गुलाम
प्लास्टिक की थैलियों ने आज हमें अपना पूरी तरह से गुलाम बना लिया है। बाजारों में दुकानों व ठेलों पर हर उम्र के लोगों के हाथों में थैलियां ही नजर आएंगी। आज घर से निकलते समय कपड़े का थैला या थैली ले जाने में शर्म महसूस करते हैं। हम देखें तो कई बार जानवरों के पेट का ऑपरेशन केवल इसलिए किया जाता है क्योंकि उनके पेट में प्लास्टिक की थैलियां जमा हो जाती है।

जागरूक होने की जरूरत
&पॉलीथिन को लेकर कितनी भी कार्रवाई की जाए, लेकिन जब तक हमारे अंदर जागरुकता नहीं आएगी, तब तक हम इसके प्रभाव को नहीं रोक सकते।
दरियाव राजपुरोहित, छात्रा

महिलाएं उठाएं बीड़ा
शहर में पॉलीथिन को लेकर अभियान बहुत कम देखने को मिलते हैं। महिलाओं को बीड़ा उठाते हुए कपड़े के थैले ज्यादा से ज्यादा बना कर वितरित करने चाहिए।
आरती सांखला, छात्रा


बच्चों को बताएं नुकसान
बच्चों को स्कूल में ज्यादा से ज्यादा पॉलीथिन के उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताना चाहिए, जिससे हमार भविष्य खतरे में ना पड़े।
अंकिता शेखावत

पर्यावरण प्रेमी बनें
पॉलीथिन मनुष्य के साथ-साथ
पर्यावरण के लिए भी नुकसानदाय होती है। इससे पर्यावरण को खतरा है। पर्यावरण प्रेमी बनते हुए अपनी जिम्मेदारी समझें।
हेन्द्र ईनाणियां


कार्रवाई की जरूरत
प्रशासन द्वारा बहुत कम कार्रवाई
की जाती है या फिर करते हैं तो छोटे-छोटे दुकानदारों से दो-तीन किलो पॉलीथिन जब्त कर कागजी कार्रवाई पूरी कर लेते हैं। उत्पादन एवं डीलर के कार्रवाई हो तो असर होगा।
भागीरथ शर्मा, छात्र

कार्रवाई की गई
पिछले डेढ़ माह में काम ज्यादा होने के कारण पॉलीथिन को लेकर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं कर सके। हां, दो-तीन दिन पहले कोई कार्रवाई की गई थी ।
नरेन्द्र चौधरी, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, नागौर

ये भी पढ़ें

एनएसएस सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्माण की ‘फैक्ट्री’
Published on:
28 Oct 2017 11:59 am
Also Read
View All