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एनएसएस सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्माण की ‘फैक्ट्री’

बीआर मिर्धा कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय अजमेर संभाग स्तरीय एनएसएस की कार्यशाला का समापन

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two-day Ajmer division-level NSS workshop Completion at mirdha college

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नागौर. बढ़ती सडक़ दुर्घटनाएं आज चिंता का विषय बन गई हैं। जिस परिवार में ऐसी घटनाएं होती है, उन पर दु:ख का पहाड़ टूट जाता है। इसलिए सभी को अपनी व परिवार की हिफाजत के लिए हेलमेट का उपयोग, वाहन की गति, संकेत बोर्ड, सवारियों की संख्या आदि को ध्यान में रखकर सावधानी बरतनी चाहिए। यह बात सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखदेव सिंह ने बुधवार को बीआर मिर्धा कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय अजमेर संभाग स्तरीय एनएसएस कार्यशाला के समापन कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग, नशा करके वाहन चलाना या फिर शौकिया अंदाज में ओवर टेक करना आदि से होने वाली दुर्घटनाएं पूरे परिवार के सपनों को चंद मिनटों में खत्म कर देती हैं। इसलिए स्वयं सेवकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वो स्वयं रोल मॉडल बने और दूसरों को अनुसरण करने की सीख दें।

स्वच्छ भारत ही बन सकता है स्वस्थ भारत
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. कैलाश नाथ व्यास ने स्वच्छता मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन में हमारी भूमिका विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि सम्यक आचार विचार, खान-पान व संयमित दिनचर्या द्वारा अनेक व्याधियों से बचा जा सकता है। एनएसएस देश का बहुत बड़ा संगठन है। जिसमें युवाओं का जोश एवं जज्बा जुड़ा है। यदि यह संगठन स्वच्छता की ठान ले तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना समय से पूर्व साकार हो सकता है।

संस्कारित युवा देश की धरोहर
भाजपा नेता जगबीर छाबा ने कहा कि एनएसएस की स्थानीय इकाई को उन्होंने बहुत करीब से देखा है। इसे देखकर लगता है कि एनएसएस सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्माण की फैक्ट्री है। उन्होंने कहा कि अनुशासित व संस्कारित युवा देश की धरोहर है। जाट समाज समन्वय समिति के अध्यक्ष परमाराम जाखड़ ने कहा कि एनएसएस स्वयं सेवक व अधिकारी एक अच्छा इंसान, अच्छा अधिकारी, अच्छा कर्मचारी, व्यवसायी या फिर परिवार का मुखिया हो सकता है। इसलिए शैक्षिक जानकारी के साथ इस तरह की जीवनोपयोगी जानकारी भी लेनी चाहिए। उद्यमी एवं भामाशाह भंवरलाल तंवर व डॉ. प्रदीप गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को ऑफिस फाइल भेंट की। सत्र के अंत में विभिन्न महाविद्यालयों से आए कार्यक्रम अधिकारियों ने एनएसएस के सफल संचालन को लेकर चर्चा की। प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से चिंता जताते हुए कहा कि एनएसएस, स्वैच्छिक कार्यक्रम रहा ही नहीं। वर्ष पर्यान्त इतने कार्यक्रम लाद दिए जाते हैं कि उनकी अक्षरश पालना की जाए तो कार्यक्रम अधिकारी न तो शैक्षिक कार्य करवा पाए और ना ही स्वयं सेवक अध्ययन कर सकता है। सभी ने एनएसएस सर्टिफिकेट को रोजगारोन्मुखी बनाने की बात कही।

स्वयं सेवकों को मिलेगी प्रेरणा
आखिर में प्राचार्या सुनीता गुप्ता ने एनएसएस अधिकारियों, प्रतिभागियों, स्वयं सेवकों, व्याख्याताओं व अन्य अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन सचिव एवं एनएसएस अधिकारी डॉ. शंकरलाल जाखड़ ने कहा कि विपरित परिस्थितियों में हम कुछ अच्छा करेंगे तो स्वयं सेवकों को इससे प्रेरणा मिलेगी। डॉ. महेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि काम ही हमारी पहचान है। इस मौके पर सीताराम ताण्डी, डॉ. रणजीत पूनिया, डॉ. दिलीप पंवार, डॉ. विजय लक्ष्मी जैन, डॉ. मनीष जोशी, डॉ. भूपेश, डॉ. प्रकाश नारायण, डॉ. सुखराज पुनड़, डॉ. पूर्णिमा झा, डॉ. हेमाराम धुंधवाल, उम्मेदराम जाजड़ा, छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेन्द्र दौतड़, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रणजीत धौलिया आदि मौजूद थे।