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‘मेरे जैसे बन जाओगे, जब इश्क तुम्हें हो जाएगा’

पत्रिका ‘स्वर-साधना’ कार्यक्रम

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Rajasthan patrika Voice-Sadhna Program

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नागौर. राजस्थान पत्रिका व भामाशाह किरोड़ीमल कड़ेल के संयुक्त तत्वावधान में बालसमंद स्थित गीतादेवी कड़ेल भवन में रविवार को ‘स्वर साधना’ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। दशकों के रियाज की मिठास स्वर लहरियों में सुनी तो हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। युवा कलाकारों को जब वरिष्ठ कलाकारों का सान्निध्य मिला तो मानो उनका उत्साह भी परवान चढ़ गया। दीपावली के उपलक्ष्य में सजे कार्यक्रम में गायकों और वादकों ने अपने हुनर से खूब वाहवाही बटोरी। स्वर साधकों ने एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दी। गोविंद कड़ेल, विशाल कड़ेल, प्रीतम भट्ट, कुशाल कड़ेल ने सहयोग किया। इस मौके भारत विकास परिषद के प्रांतीय संरक्षक नृत्यगोपाल मित्तल, गणेश त्रिवेदी, लक्ष्मीनारायण सोनी, दामोदर मणिहार, कांतिलाल उपस्थित थे।

मैं तो मरकर भी मेरी जान तुम्हें चाहुंगा....
गायक शर्मा ने मां सरस्वती की वंदना राग गोपिका बसंत में ‘विद्या दानी दयानी सरस्वती’, राग दरबारी कानड़ा में ‘जो गुरु कृपा करे नर’ सहित राग पंचम, मुल्तानी आदि में प्रस्तुतियां दी। शर्मा ने वहां मौजूद गायकों को रागों की बारिकियों के बारे में भी जानकारी दी। गायक कैलाश गौड़ ने सुरीले अंदाज में ‘मेरे जैसे बन जाओगे, जब इश्क तुम्हें हो जाएगा’ पेश कर श्रोताओं आनंदित कर दिया। इसके बाद उन्होंने भक्ति से ओतप्रोत गुरु महिमा सुनाई। युसूफ बक्षी ने भूले बिसरे गीतों को सुरों में पिरोया तो मानो हर कोई इस फ नकार के सुर सुनता ही रह गया। युवा गायक दामोदर देवड़ा ने ‘जिंदगी में तो सभी प्यार किया करते हैं, मैं तो मरकर भी मेरी जान तुम्हें चाहुंगा’ पेश कर खूब दाद बटोरी। स्वर साधना की शुरुआत युवा गज़ल गायक देवेन्द्र त्रिवेदी ने गणेश वंदना से की। इसके बाद त्रिवेदी ने गज़लों की प्रस्तुति दी। रामेश्वरलाल सोनी, कुमरकांत झा ने प्रस्तुतियां दी। इस अवसर पर नरेन्द्र जोशी ‘प्रेमी’, अजय व्यास, कुमरकांत झा ने तबले पर संगत की।

रोक नहीं पाए....
दीपावली के उपलक्ष्य में विशेष रूप से सजे ‘स्वर-साधना’ में हरिमा के संगीत शिक्षक व शास्त्रीय गायक भूराराम शर्मा तथा नागौर के वरिष्ठ तबला वादक धनराज सोनी ने भी प्रस्तुति दी। शास्त्रीय गायक शर्मा ने जब अलग-अलग रागों की बंदिशे सुनाई तो वरिष्ठ तबला वादक सोनी अपने आपको रोक नहीं पाए और दाएं हाथ व घुटनों के दर्द को भूलाकर स्वयं तबले पर ताल मिलाने लग गए। इन दोनों की जुगलबंदी को सुनने के बाद वहां मौजूद स्वर-साधकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से इनका स्वागत किया।