Nagaur Mandi Bhav : 15 से 27 अप्रेल के बीच यानि की महज 12 दिनों में ही कृषि मंडी में जिंसों के भावों के उतार-चढ़ाव से कई जिंसों के भाव गिरे हैं तो कुछ भावों में तेजी आई है। इस अवधि में सबसे बड़ी गिरावट जीरा में आई है।
नागौर। 15 से 27 अप्रेल के बीच यानि की महज 12 दिनों में ही कृषि मंडी में जिंसों के भावों के उतार-चढ़ाव से कई जिंसों के भाव गिरे हैं तो कुछ भावों में तेजी आई है। इस अवधि में सबसे बड़ी गिरावट जीरा में आई है। इसके अधिकतम भाव 25 हजार से गिरकर 21 हजार रह गया, यानी कि 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल की सीधी कमी आई है। जबकि सौंफ का मामला इससे काफी अलग रहा है। सौंफ में सबसे ज्यादा तेजी आई है। इसके भाव प्रति क्विंटल 17 हजार से बढ़कर 20 हजार 300 तक पहुंच गई, यानी कि 3 हजार 300 रुपए प्रति क्विंटल का उछाल इसमें आया है। मूंग, तिल और चना जैसी जिंसों में स्थिरता बनी रही, जबकि अन्य जिंसों में हल्का उतार-चढ़ाव रहा।
कृषि उपजमंडी के कारोबार में मसाला फसलों में जीरा के भावों में प्रति क्विंटल चार हजार की दर की आई कमी ने इसके काश्तकारों के होश उड़ा दिए हैं। 15 अप्रेल को 25 हजार का स्तर 27 अप्रेल तक आते-आते 21 हजार पर सिमट गया। लगातार गिरावट ने किसानों की आमदनी पर सीधा असर डाला और बाजार में मंदी का संकेत दिया।
दूसरी ओर सौंफ के भावों में आई उछाल से इसे लेकर आए उत्पादक काश्तकार नजर आए। 15 अप्रेल को 17 हजार से शुरू होकर 27 अप्रेल को 20 हजार 300 तक पहुंच गए। मजबूत मांग और सीमित आवक के चलते यह तेजी बनी रही, जिससे किसानों को कुछ राहत मिली।
मूंग के भाव पूरे समय 7 हजार 500 के आसपास स्थिर रहे। काला तिल 9 हजार और सफेद तिल 10 हजार पर टिके रहे। चना भी 4 हजार 900 से 5 हजार के बीच बना रहा। इन जिंसों की स्थिरता ने बाजार को पूरी तरह गिरने से बचाए रखा। इसी तरह से ईसबगोल 14 हजार 700 से घटकर 13 हजार 800 तक आ गया। ज्वार के भाव 4 हजार 200 से गिरकर 3 हजार 800 तक पहुंच गए। ग्वार, मेथी और तारामीरा में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन हल्का दबाव बना रहा।
सरसों भी 6 हजार 200 से 6 हजार 400 के बीच घूमते हुए अंत में 6 हजार 350 पर स्थिर हुई। जीरा के गिरते भावों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मूण्डवा से आए किसान प्रभुराम ने बताया कि 15 अप्रेल को जो जीरा 25 हजार तक बिक रहा था, वही 27 अप्रेल को 21 हजार रह गया। जिससे मुनाफा घट गया।
हनुमानराम विश्नोई का कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन भाव गिरने से मेहनत का पूरा दाम नहीं मिल पा रहा। किसानों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आगे नुकसान और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर 12 दिनों की यह अवधि बाजार के लिए मिश्रित संकेत लेकर आई है। जीरा में गिरावट ने चिंता बढ़ाई है, जबकि सौंफ की तेजी ने राहत दी है।
मंडी कारोबार से जुड़े व्यापारी रमेश्वर सरस्वत और पवन भट्ट के अनुसार इस अवधि में भावों का उतार-चढ़ाव पूरी तरह मांग और आवक पर आधारित रहा। जीरा में गिरावट का मुख्य कारण मंडी में बढ़ी आवक और निर्यात मांग में कमजोरी रही, जिससे भाव दबाव में आ गए। वहीं सौंफ में सीमित आवक और लगातार बनी मांग के कारण तेजी बनी रही। व्यापारियों के अनुसार फिलहाल बाजार में स्थिरता की स्थिति नहीं है और आने वाले दिनों में भी आवक और बाहरी मांग के आधार पर भावों में इसी तरह उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।