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राजस्थान में ईरान-इजरायल तनाव का तगड़ा असर, दोगुनी हुई डामर की कीमतें, अटकी करोड़ों की परियोजनाएं

Iran-Israel Conflict: प्रदेशभर में कई हजार करोड़ की सड़कों के काम अटके पड़े हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम जन मन योजना समेत बजट घोषणाओं की सभी डामर सड़कों के काम रूक गए हैं।

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बारां

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Akshita Deora

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राकेश गुप्ता

Apr 28, 2026

New Road

Photo: AI-generated

Bitumen Prices Hike: ईरान-इजरायल-अमरीका युद्ध के कारण मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से देश में डामर का उत्पादन घट गया है, इससे इसके दाम दोगुना हो गए है। पहले एक टन डामर 45 से 50 हजार रुपए प्रति टन आ रहा था, उसकी दरें करीब एक लाख रुपए तक पहुंच गई है।

इसके बावजूद मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं हो रही। ऐसे में राजस्थान में डामर की सड़कों के निर्माण रूक गए हैं। ठेकेदारों ने काम रोक दिए हैं। अकेले बारां जिले की बात करें तो केवल पीडब्ल्यूडी में ही 250 करोड़ से ज्यादा की दर्जनों सड़कें अटक गई हैं। इसके अलावा आरएसआरडीसी की सड़कों का काम भी रूक गया है।

रिफाइनरियों से आता है डामर

जानकारों के अनुसार रिफाइनरी में कच्चे तेल को गर्म किया जाता है। पेट्रोल, डीजल और केरोसिन को अलग करने के बाद टावर के तेल में जो गाढ़ा काला पदार्थ बचता है, वही डामर [बिटुमिन] होता है। देश में पानीपत, कोच्चि, मथुरा जैसी कई रिफाइनरियों से डामर आता है। ठेकेदार पहले कंपनियों में माल बुक कराते है। युद्ध के कारण विदेशों से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से रिफाइनरियों में भी पहले की तरह डामर का उत्पादन नहीं हो पा रहा।

हर योजना की सड़कों के काम रुके

सूत्रों ने बताया कि प्रदेशभर में कई हजार करोड़ की सड़कों के काम अटके पड़े हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम जन मन योजना समेत बजट घोषणाओं की सभी डामर सड़कों के काम रूक गए हैं। बारां जिले में पीडब्लयूडीए आरएसआरडीसी व अन्य विभागों में 400 करोड़ से ज्यादा की डामर सड़कों का काम रूक गया है। अटकी हैं।

सूत्रों के अनुसार एक सादा डामर सड़क में प्रति किलोमीटर करीब 10 टन डामर का इस्तेमाल होता है। मोटी लेयर वाली सड़क में इससे ज्यादा मात्रा लगती है। पिछले महीने तक डामर 45-50 हजार रुपए प्रति टन था, अब इसके दाम बढ़कर 1 लाख तक पहुंच गए हैं। इसके बाद भी पूरी सप्लाई नहीं आ रही।

ठेकेदारों पर ऐसे मार

निर्माण कार्य के ठेके के समय एस्केलेशन होता है, जिसके अनुसार निर्माण सामग्री की दरें बाद में ज्यादा बढऩे पर ठेकेदार को राहत मिल जाती है, लेकिन इसमें भी कई शर्तें और प्रावधान होते हैं। इस कारण उन्हें राहत भी पूरी नहीं मिलती। पीएम जन मन या पीएम ग्राम सड़क योजना आदि में एस्केलेशन का प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में बढ़ी दरों के कारण ठेकेदारों ने काम रोक दिए हैं।

कुछ दिनों में ही डामर 90 हजार-1 लाख प्रति टन तक पहुंच गया है। इसके बाद भी प्रॉपर सप्लाई नहीं है। बारां जिले में पीडब्ल्यूडी के 250 से 300 करोड़ के काम अटके हुए हैं। 100 से 200 करोड़ के काम दूसरे विभागों के हैं। किल्लत और दरें बढऩे के बीच डामर के फिलहाल छिटपुट व इमरजेंसी काम ही हो रहे हैं।
हुकुमचंद मीणा, अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी बारां