नागौर

Rajasthan: 7 साल तक शिक्षक ने छात्रा को डराकर की आपत्तिजनक हरकत, मैसेज करके बोलते थे ‘फेल कर दूंगा’

राजस्थान के डीडवाना में एक शिक्षक द्वारा छात्रा को वर्षों तक डराने, ब्लैकमेल करने और आपत्तिजनक हरकतें करने के मामले में पोक्सो कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी शिक्षक को 3 साल की जेल की सजा सुनाई।
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Updated: 6 Jun 2026, 2:44 PM IST
Rajasthan Police Jeep
पुलिस जीप की प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका

न्यायालय विशिष्ट न्यायाधीश लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पोक्सो कोर्ट) डीडवाना के पीठासीन अधिकारी एनएस मीणा ने शुक्रवार को एक मामले में छात्रा से छेड़छाड़ करने और पीछा कर ब्लैकमेल करने के दोषी शिक्षक रामसिंह को सजा से दंडित किया। कोर्ट ने आरोपी रामसिंह पुत्र अजीत सिंह (49) को धारा 354 (घ) भारतीय दण्ड संहिता के तहत दोषी मानते हुए 3 वर्ष के साधारण कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। पीड़िता ने 27 दिसंबर 2023 को पुलिस में यह मामला दर्ज कराया था।

7 साल किया प्रताड़ित

पुलिस रिपोर्ट में पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2016 में शिक्षक रामसिंह ने परीक्षा में फेल करने का डर दिखाकर अश्लील हरकत की। इसके बाद फोन और मैसेज कर ब्लैकमेल करने लगा। साल 2020 में डराकर बुलाया और शोषण किया। बाद में नवंबर 2023 में आरोपी ने पीड़िता को बदनाम व जान से मारने की धमकी देकर बलात्कार का प्रयास किया। इससे परेशान होकर पीड़िता ने परिजनों को आपबीती बताई।

पुलिस ने लगाई थी एफआर

पुलिस ने अनुसंधान के बाद मामले को झूठा मानते हुए कोर्ट में अंतिम प्रतिवेदन (नकारात्मक रिपोर्ट) पेश कर दी थी। इसके खिलाफ परिवादिया ने न्यायालय में विरोध याचिका दाखिल की। विशिष्ट कोर्ट ने पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों के आधार पर अपराध को प्रथम दृष्ट्या प्रमाणित मानकर पुलिस की एफआर को खारिज किया। मामले में प्रसंज्ञान लेकर विचारण शुरू किया।

संदेह के लाभ में पोक्सो से बचा

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि जन्मतिथि का पुख्ता दस्तावेजी आधार नहीं होने से पीड़िता को घटना के वक्त युक्तियुक्त संदेह से परे नाबालिग नहीं माना जा सकता। ऐसे में आरोपी को पोक्सो एक्ट की धारा 11/12 के बजाय आइपीसी की धारा 354 (घ) (पीछा करना/मर्जी के खिलाफ संपर्क बढ़ाना) में दोषी ठहराया गया।

नरमी बरती तो जाएगा गलत संदेश: कोर्ट

पीड़िता के वकील सहदेव ठोलिया ने बताया बचाव पक्ष के वकीलों ने आरोपी के सरकारी शिक्षक होने का हवाला देते हुए परिवीक्षा (प्रोबेशन) का लाभ देकर छोड़ने की बात कही। इसका विशिष्ट लोक अभियोजक विरेन्द्र सिंह राठौड़ ने कड़ा विरोध किया। न्यायाधीश एन.एस. मीणा ने फैसला सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की कि गुरु-शिष्य का रिश्ता बेहद पवित्र होता है। आरोपी ने इसकी मर्यादा का ध्यान रखे बिना छात्रा पर गलत नजर रखी। अभियुक्त एक शिक्षक है। ऐसे गंभीर मामलों में यदि उसके प्रति नरमी का रुख अपनाया गया, तो समाज में गलत संदेश जाएगा। शिक्षक जैसे पुनीत कार्य की प्रतिष्ठा धूमिल होगी। दूषित मानसिकता वाले ऐसे आरोपियों के हौसले बुलंद होंगे। न्यायालय ने आरोपी को परिवीक्षा का लाभ देने से साफ इनकार करते हुए 3 साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित कर जेल भेज दिया।

Updated on:
6 Jun 2026, 2:44 PM IST
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