
Rajasthan Farmers Loan Crisis: खींवसर (नागौर): किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का दंभ भरने वाला सहकारिता विभाग राहत के नाम पर किसानों को दिए जा रहे अल्पकालीन फसली ऋण में फर्जीवाड़ा कर रहा है। ग्राम सेवा सहकारी समितियां पुराने सदस्यों को ऋण दे रही, जबकि नए सदस्यों को नजरअदांज कर रही हैं। किसानों को फसलों में निर्धारित ऋण की करीब 10 प्रतिशत राशि ही देकर टरकाया जा रहा है, वो भी कुछेक किसानों को।
यह नाममात्र का ऋण भी प्रदेश के करीब सवा लाख से अधिक किसानों को पिछले चार वर्षों से नहीं दिया जा रहा। ऐसे में किसानों को साहूकारों से फलस के लिए मोटे ब्याज पर ऋण लेना पड़ रहा है। ऐसे में फसल ऋण निर्धारण कमेटी की ओर से तय की गई राशि का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
खास बात यह है कि नाम मात्र का ऋण देकर सहकारिता विभाग किसानों को बंधक बना रहा है। इस कारण किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लाभ से भी वंचित हैं, जिस किसान का फसलों के आधार पर डेढ़ लाख रुपए ऋण बनता है उसे केवल 10 हजार रुपए देकर रवाना किया जा रहा है। उसमें भी हिस्सा राशि सहित अन्य चार्ज वसूल कर किसान को केवल 8500 रुपए मिलते हैं।
सहकारिता विभाग की कारगुजारी देखिए, पहले रबी और खरीफ का अलग-अलग ऋण दिया जाता था, अब दोनों फसलों को एक ही राशि में शामिल कर दिया। ऐसे में किसान साढ़े चार हजार रुपए एक फसल की खेती कैसे कर पाएंगा। विभागी अधिकारी इसे प्रदेश स्तर की समस्या बताकर टाल रहे हैं।
प्रदेश की सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों के 1,36,603 नए सदस्य बनाए गए हैं। लेकिन विभाग नए सदस्यों को कोई ऋण नहीं दे रहा। अल्पकालीन ऋण में वर्ष 2013 से सम्पूर्ण ब्याज मुक्त करने के बाद ऋण लेने वाले किसानों की होड़ मची, लेकिन अब किसानों के निर्धारित ऋण का भी 10 प्रतिशत ऋण ही देने एवं नए सदस्यों को ऋण नहीं देने से किसान सहकारी समितियों से किनारा करने लगे हैं।
किसानों को निर्धारित फसली ऋण राशि नहीं मिलने से जिला स्तरीय ऋण निर्धारण कमेटी की उपयोगिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। यह कमेटी प्रत्येक तीन वर्ष में बैठक कर विभिन्न फसलों के लिए ऋण की वित्तीय सीमा तय करती है, लेकिन बैंकों की ओर से उसी अनुरूप ऋण नहीं देने से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा।
कमेटी में शामिल लीड बैंक, यूको बैंक, मरूधरा बैंक, सहकारी समितियों, कृषि विभाग तथा विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी शामिल होकर फसलवार वित्तीय मापदंड निर्धारित करते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को तय मानकों के अनुसार फसली ऋण उपलब्ध कराना है, लेकिन वास्तविकता में निर्धारित राशि नहीं मिलने से कमेटी के निर्णय केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।
| जिला | नए सदस्य | नए सदस्य अंडर प्रोसेसिंग |
|---|---|---|
| टोंक | 3354 | 341 |
| दौसा | 3436 | 383 |
| बालोतरा | 2809 | 130 |
| झालावाड़ | 2822 | 315 |
| डीडवाना | 3162 | 279 |
| कुचामन | - | - |
| ब्यावर | 2193 | 179 |
| भरतपुर | 2119 | 262 |
| धौलपुर | 1245 | 158 |
| भर्तीहरि नगर | 1964 | 162 |
| चित्तौड़गढ़ | 2219 | 521 |
| हनुमानगढ़ | 3300 | 560 |
| चूरू | 3214 | 519 |
| सवाई माधोपुर | 2102 | 281 |
| भरतपुर | 4309 | 666 |
| अलवर | 3936 | 469 |
| श्रीगंगानगर | 3300 | 884 |
| बीकानेर | 3401 | 306 |
| प्रतापगढ़ | 1764 | 199 |
| करौली | 2224 | 293 |
| जालोर | 3462 | 461 |
| नागौर | 3442 | 477 |
| जिला | नए सदस्य | नए सदस्य अंडर प्रोसेसिंग |
|---|---|---|
| सलूंबर | 1177 | 86 |
| जयपुर | 18661 | 1553 |
| सिरोही | 1969 | 266 |
| बारां | 2220 | 168 |
| राजसमंद | 2169 | 384 |
| बूंदी | 2103 | 209 |
| भीलवाड़ा | 5359 | 373 |
| कोटपूतली | 2189 | 228 |
| बहरोड | - | - |
| कोटा | 2792 | 463 |
| पाली | 3075 | 475 |
| बाड़मेर | 4987 | 171 |
| बांसवाड़ा | 2993 | 309 |
| सीकर | 5287 | 472 |
| अजमेर | 3804 | 234 |
| झुंझुनूं | 3385 | 421 |
| जैसलमेर | 2600 | 280 |
| डूंगरपुर | 2533 | 302 |
| डीग | 1526 | 137 |
| जोधपुर | 6406 | 488 |
| फलोदी | 1591 | 187 |
निर्धारित फसलवार वित्तीय मापदण्ड के अनुरूप किसानों को ऋण देना चाहिए, लेकिन मापदंड का मात्र 10 प्रतिशत ही ऋण नहीं मिल रहा है। किसान फसल बुवाई से लेकर उत्पादन तक उधारी में काम चला रहे हैं। किसान क्रेडिट कार्ड योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलता। सरकार ने रबी और खरीफ दोनों का एक ऋण कर दिया है।
-बलदेवाराम गेट, सांख्यिकी, राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन