राजस्थान के नागौर शहर के मानासर रेलवे फाटक पर बने आरओबी को तोड़ने का निर्णय मंजूर कर लिया गया है। जानिए क्या बोले सांसद हनुमान बेनीवाल—
राजस्थान के नागौर शहर के मानासर रेलवे फाटक पर बने आरओबी (रेड अंडरब्रिज) को तोड़ने का निर्णय केंद्रीय स्तर पर मंजूर कर लिया गया है। दिल्ली में आयोजित सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसे तोड़ने की सहमति दी।
सांसद हनुमान बेनीवाल ने बताया कि बैठक में केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर) की रिपोर्ट पेश की गई। उसके आधार पर मंत्री गडकरी ने पुल को हटाने का आदेश दिया। सांसद ने कहा कि इस आदेश के बाद संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
इस कदम से रेलवे फाटक और आरओबी से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलेगी और क्षेत्र में यातायात सुचारू रहेगा। बेनीवाल ने बैठक में मानासर रेलवे फाटक (सी-64) पर बने गलत रोड ओवरब्रिज में रोड इंजीनियरिंग का ताक पर रखकर निर्माण करने व डिजायन में छेड़छाड़ कर ‘यू’ आकार का मोड़ देने तथा गुणवत्ता से समझौता करने की बात कही।
इस पर मंत्री गडकरी ने कहा कि इस आरओबी को तोड़ दिया जाए। साथ ही सांसद ने नागौर से जोधपुर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी की निकासी के लिए बनाए गए नालो में हुए भ्रष्टाचार, नागौर से जोधपुर तक बनने वाले फोरलेन सड़क की डीपीआर बनाने वाली कम्पनी की ओर से डीपीआर बनाने में किए गए फर्जीवाड़े का भी जिक्र किया।
गौरतलब है कि आरओबी को लेकर शुरू से डिजायन को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे और पिछले साल जुलाई में क्षतिग्रस्त होने के बाद गुणवत्ता पर भी कई सवाल उठे। दिल्ली से आई सीएसआईआर की टीम ने गुणवत्ता को निम्न मानते हुए तोड़ने की बात कही थी। आरओबी में दिए गए खतरनाक मोड़ के कारण यहां एक दर्जन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें आधा दर्जन लोगों की मौत और कई घायल हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आरओबी में सुपर एलिवेशन नहीं है, इससे यहां बार-बार हादसे हो रहे हैं। फरवरी 2024 में एसिड से भरे टेंकर के पलटने के बाद जिस प्रकार एसिड पूरे आरओबी पर फैला, उससे इस आरओबी की सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान खड़ा हो गया था।
मानासर रेलवे क्रॉसिंग (सी-64) पर बने 1173 मीटर लम्बे व 11 मीटर चौड़े आरओबी के लिए सरकार ने वर्ष 2018 में 29.23 करोड़ स्वीकृत किए थे। 7 जून 2018 को तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री पुरषोत्तम रूपाला व सीआर चौधरी ने इस आरओबी का शिलान्यास किया।
ठेकेदार एजेंसी को आरओबी का काम 15 महीने में यानी दिसम्बर 2019 तक पूरा करना था, लेकिन पांच साल बाद काम पूरा किया और अक्टूबर 2023 में बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के आरओबी पर यातायात चालू कर दिया।
आरओबी की ड्राइंट में छेड़छाड़ और गुणवत्ता को लेकर राजस्थान पत्रिका ने समय-समय पर समाचार प्रकाशित कर मुद्दा उठाया। उसके बाद सांसद बेनीवाल ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से मिलकर उन्हें पत्र सौंपकर ओवरब्रिज की अप्रूव्ड डिजाइन के साथ की गई छेड़छाड़ तथा निर्माण में रखी गई तकनीकी खामियों से अवगत करवाया। ।
परामर्शदात्री समिति की बैठक में सांसद बेनीवाल ने कहा कि सड़कों के निर्माण में रखी जाने वाली कमियों पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। छोटे से स्वार्थ के कारण स्थानीय राजनीतिक प्रभाव, अभियंताओं और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण सड़कों में अनावश्यक मोड़ दिए जाते हैं, जो बाद में लोगों के लिए काल बन जाते हैं।
सांसद ने कहा कि सभी राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट्स का वैज्ञानिक सर्वे कर प्राथमिकता से सुधार कार्य करवाए जाएं। प्रमुख चौराहों व दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में अंडरपास/ओवरब्रिज का निर्माण किया जाए, इसके लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चले और सांसदों से सुझाव मांगे जाए।
सांसद बेनीवाल ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संस्थागत उपायों की बात करें तो जिले में कलक्टर की अध्यक्षता में बहुत पहले से रोड सेफ्टी कमेटी बनी हुई है। दूसरी भारत सरकार ने सांसदों की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है, लेकिन राजस्थान में वर्ष 2019 से लेकर 2023 तक राजस्थान सरकार ने उन आदेशों पर कोई कार्य ही नहीं किया। उन्होंने जिला सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने, उन बैठकों की मीटिंग मिनट्स का विश्लेष्ण मंत्रालय स्तर पर करने का सुझाव दिया।
सांसद ने सीआरआईएफ के अंतर्गत नागौर जिले में मेड़ता सिटी से मूण्डवा तक बनी 62 किमी सड़क, मुंदियाड़ से जोरावरपुरा तक बनी 16 किमी सड़क व नागौर से भेड़, बासनी, बैराथल व पांचला मार्ग पर बनी 32 किमी सड़क में निर्माण करने वाले संवेदक व दोषी अभियंताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। गौरलतब है कि पूर्व में इन सड़कों की हुई जांच में कई अनियमिताएं व भ्रष्टाचार होना सामने आया था।