31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Infra News: राजस्थान में इस नेशनल हाईवे पर बनेंगे 10 नए फ्लाइओवर, लेकिन इससे राहत की जगह बढ़ने वाली है परेशानी, जानिए क्यों

Infra News: जाम और सड़क हादसों से निजात दिलाने के उद्देश्य से एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-21 पर 10 नए फ्लाइओवर बनाने की योजना तैयार की है। लेकिन इससे राहत की जगह परेशानी बढ़ने वाली है। जानिए क्यों

2 min read
Google source verification

बस्सी के समीप मोहनपुरा में 19 साल पहले बना फ्लाईओवर। अब इसके नजदीक बनेगा दूसरा फ्लाईओवर।

Infra News: बस्सी। जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-21 पर यातायात जाम और सड़क हादसों से निजात दिलाने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने जयपुर से महुवा तक 10 नए फ्लाइओवर बनाने की योजना तैयार की है।

हालांकि इस योजना ने नई बहस को जन्म दे दिया है, क्योंकि प्रस्तावित 10 में से 6 स्थान ऐसे हैं, जहां पहले से ही फ्लाइओवर या रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) मौजूद हैं।

ऐसे में वाहन चालकों को एक फ्लाइओवर से उतरते ही कुछ ही दूरी पर दूसरे फ्लाइओवर पर चढ़ना पड़ेगा, जिससे सुविधा के बजाय परेशानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार करीब 19 साल पहले एनएच-21 पर बनाए गए फ्लाइओवर यातायात दबाव के सही आकलन के बिना बनाए गए थे। न तो इनसे जाम की समस्या दूर हुई और न ही सड़क दुर्घटनाओं में अपेक्षित कमी आई।

अब एनएचएआइ ने उन्हीं पुराने फ्लाइओवरों के एक किलोमीटर के दायरे में नए फ्लाइओवर बनाने का फैसला किया है, ताकि चौराहों, कट्स और रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम से राहत मिल सके।

एनएचएआइ का कहना है कि नए फ्लाइओवर अब ऐसे स्थानों पर बनाए जाएंगे, जहां से मुख्य ट्रैफिक निर्बाध निकल सके। हालांकि इसके चलते कई जगहों पर वाहन चालकों को लगातार दो फ्लाइओवरों पर चढ़ाई-उतराई करनी पड़ेगी।

इन जगहों पर पहले से बने हैं फ्लाइओवर

कानोता, बस्सी के मोहनपुरा, दौसा, सिकंदरा, मानपुर और मेहंदीपुर बालाजी में पहले से फ्लाइओवर बने हुए हैं। लेकिन ये संरचनाएं उन बिंदुओं पर नहीं बनाई गईं, जहां वास्तविक यातायात दबाव रहता है। परिणामस्वरूप वाहन चालकों को आज भी चौराहों पर रुकना पड़ता है और जाम व हादसों का खतरा बना रहता है।

ईंधन और समय पर पड़ेगा असर

स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि भारी वाहनों को एक फ्लाइओवर से उतरते ही तुरंत दूसरे पर चढ़ना पड़ेगा, जिससे ईंधन की खपत बढ़ेगी और वाहनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। बसों और ट्रकों के साथ-साथ छोटे वाहन चालकों को भी बार-बार गति कम-बढ़ाने की मजबूरी झेलनी पड़ेगी, जिससे समय की बर्बादी होगी।

यहां प्रस्तावित हैं नए फ्लाइओवर

एनएचएआई की योजना के अनुसार जयपुर-महुवा मार्ग पर कानोता, बस्सी चक, बांसखोह फाटक, जीरोता मोड़, दौसा कलक्ट्रेट क्षेत्र में दो, सिकंदरा, मानपुर और मेहंदीपुर बालाजी में नए फ्लाइओवर बनाए जाएंगे। साथ ही महुवा से भरतपुर के बीच भी फ्लाइओवर निर्माण की योजना है।

…तो नहीं आती अतिरिक्त खर्च की नौबत

एनएच-21 पर पहले बनाए गए फ्लाइओवर करीब 19 साल पुरानी योजना का परिणाम हैं, जिनमें भविष्य की जरूरतों का सही आकलन नहीं किया गया। अब करोड़ों रुपए की नई लागत से दोबारा फ्लाइओवर बनाए जा रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि पहले ही सही स्थानों पर निर्माण किया गया होता, तो आज दोहरी संरचनाओं और अतिरिक्त खर्च की नौबत ही नहीं आती।

Story Loader