नागौर

गुरु-शुक्र ग्रह बनेंगे विवाह की राह में स्पीड-ब्रेकर

देव उठनी एकादशी के अबूझ सावे के बाद 23 नवंबर को होगा पहला सावा

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Oct 27, 2017
Thurs-Venus will become a speed-breaker in the road to marriage

नागौर. देव उठनी एकादशी के बावजूद इस बार सावों की मंदी रहेगी। धनुर्मास, मलमास के साथ विवाह के प्रमुख कारक माने जाने वाले महत्वपूर्ण ग्रह गुरु व शुक्र विवाह का सपना संजो रहे युवाओं की राहों में रोड़ा बनेंगे। ज्योतिषाचार्यों की माने तो इस वर्ष विवाह का मुहूर्त का टोटा रहेगा। गिनती के सावों में ही बेटे-बेटियों के हाथ पीले करने पड़ेंगे। देव उठनी एकादशी के अबूझ सावे के बाद 23 नवंबर को पहला सावा होगा। इसके बाद नवंबर से लेकर मार्च तक प्रमुख रूप से दर्जनभर सावे ही रहेंगे। जानकारों का कहना है कि देव प्रबोधिनी एकादशी से पहले ही 11 अक्टूबर से विवाह के प्रमुख कारक बृहस्पति अस्त रहेंगे व 6 नवंबर को उदय होंगे। इधर, 15 दिसम्बर 2017 को विवाह का ही प्रमुख कारक शुक्र तारा भी अस्त हो जाएगा। नए वर्ष में 3 फरवरी को उदय होगा। दोनों प्रमुख तारों के अस्त रहने के कारण इस दौरान मांगलिक आयोजन नहीं होंगे। सावों को तय करने के लिए विभिन्न बिंदुओं को देखा जाता है। इस वर्ष कम ही सावे होंगे।

कब-कब रहेंगे सावे
करीब चार माह देवशयन काल के बाद 31 अक्टूबर को देवप्रबोधिनी एकादशी मनाई जाएगी। विवाह के लिए इस मुहूर्त को अबूझ माना गया है। इस मुहूर्त में जमकर मांगलिक कार्य होंगे। इसके बाद करीब तीन सप्ताह तक विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं होगा। बंशीवाला मंदिर के पुजारी सीताराम व महेश ने बताया कि नवंबर माह में 23, २८, 29 नवंबर को ही विवाह मुहूर्त हैं। जबकि दिसंबर माह में ३, 4, 10 व 11 दिसंबर को विवाह के मुहूर्त है। इसी प्रकार फरवरी 2018 में 6, 7 व 18, वहीं मार्च माह में 6 व 8 मार्च को सावे रहेंगे। हालांकि अलग-अलग पंचागकारों के ज्योतिषीय दृष्टिकोण के चलते सावों की तिथि में कुछ अंतर हो सकता है।

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29 से शुरू होंगे तुलसी त्रार्थ व्रत
बंशीवाला मंदिर के पुजारी सीताराम ने बताया कि 29 अक्टूबर को आवला नवीं से तीन दिवसीय तुलसी त्रार्थ व्रत शुरू होंगे। जिसमें माता-बहने रोजाना शाम 5 बजे बंशीवाला मंदिर आकर कथा सुनेंगी। इसके बाद 31 अक्टूबर को देवप्रबोधनी के दिन रात्रि सवा 2 बजे चार महीने के शयनकाल के बाद भगवान को वैदिक मंत्रों के साथ जगाया जाएगा। इसके बाद भगवान को दही, दूध, घी, शक्कर, केसर आदि से स्नान कराया जाएगा। पूरी रात भगवान की विभिन्न झांकियों के दर्शन होंगे। बाद में पंचामृत प्रसाद वितरित किया

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Published on:
27 Oct 2017 11:15 am
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