नागौर

वीडियो : एंटी इनकम्बेंसी एक भ्रम जैसी स्थिति है, हम दुबारा सरकार बनाएंगे – उत्ता

https://www.patrika.com/nagaur-news/ भाजपा शहर जिला अध्यक्ष रामचंद्र उत्ता से खास बातचीत
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Oct 22, 2018
city district president Ramchandra Utta
Ramchandra Utta

रुद्रेश शर्मा
नागौर. प्रदेश में चुनावी बिसात बिछने को तैयार है। नेता टिकट के जुगत में हैं तो पार्टियां दावेदारों की फेहरिस्त से जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवारों के नाम खंगाल रही है। भाजपा हो या कांग्रेस नागौर जिला सूबे की सियासत में दमदार दखल रखता है। जिले की दस विधानसभा सीटों पर कैसे तय होंगे विधायक उम्मीदवारों के चेहरे, संगठन कैसे निपटेंगे गुटबाजी से और तीसरे मोर्चे की आहट का किस पर कितना असर आएगा? कुछ ऐसे ही सवालों पर राजस्थान पत्रिका ने भाजपा शहर जिला अध्यक्ष रामचंद्र उत्ता से खास बातचीत की।

प्रश्न : टिकट वितरण में भाजपा की क्या रणनीति रहेगी, किस आधार पर टिकट दिए जाएंगे?
- संगठन ने रायशुमारी, सर्वे आदि के जरिए जिताऊ और टिकाऊ नेताओं को टिकट देने की योजना बनाई है। हर स्तर के कार्यकर्ताओं से राय ली जा रही है। चार संभाग की 102 विधानसभा की रायशुमारी रणकपुर में हो चुकी है। शेष 98 विधानसभा, जिनमें नागौर जिला भी शामिल है, इसके लिए आज से जयपुर में रायशुमारी शुरू हुई है।
प्रश्न : राजस्थान में पहले कभी किसी पार्टी की सरकार रिपीट नहीं हुई। ऐसे में भाजपा ने ऐसी क्या तैयारी की है, जिससे की दुबारा सत्ता में आ सके?
- हम बिल्कुल इस मिथक को तोड़ेंगे। हम सरकार की ओर से किए गए विकास कार्य और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर जनता के बीच जाएंगे। राजस्थान में फिर से भाजपा की सरकार बनेगी।
प्रश्न : इस चुनाव में एंटी इनकम्बेंसी भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले चुनाव में जितना बहुमत पार्टी को मिला, उसके अनुरूप कार्य नहीं हुए। कैसे निपटेंगे इससे?
- बहुत ज्यादा बहुमत से यदि कोई सरकार बनती है तो कार्यकर्ता और जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ती है। सारी अपेक्षाएं कभी एक साथ पूरी नहीं हो पाती। बहुत हद तक हमारी पार्टी ने अच्छा शासन किया। सभी को संतुष्ट करने का प्रयास किया। अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के विकास के लिए भी पार्टी ने सोचा। एंटी इनकम्बेंसी एक भ्रम जैसी स्थिति है, जिसे पैदा करने में कुछ लोग सफल हो जाते हैं। हम इसे नकार देंगे।
प्रश्न : पिछली बार नागौर जिले के दस में से नौ विधायक भाजपा के बने, इसके बावजूद पेयजल, बछड़ों का परिवहन और तांगा दौड़़ जैसे मुद्दों पर जन अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई?
- पेयजल की कोई समस्या अब नागौर में नहीं है। क्योंकि सरकार ने नहरी पानी की योजना से पूरे जिले को लाभान्वित कर अनुकरणीय कार्य किया है। हमारे मंत्री एवं विधायकों ने बराबर इस योजना पर काम किया है। सम्पूर्ण जिले में पानी की व्यवस्था में सुधार आया है। जहां तक बछड़ों का मसला है यह न्यायालय में विचाराधीन है। यह मांग हमारे नेताओं ने बराबर उठाई है। संभव है बछड़े की उम्र घटाकर इसमेें जल्द ही कोई राहत मिल सके।
प्रश्न : निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल तीसरे मोर्चे के गठन की बात कह रहे हैं, भाजपा पर इसका क्या असर पड़ेगा?
- वे निर्दलीय विधायक हैं मोर्चा बनाएं, पार्टी बनाएं कुछ भी करें। इसके बारे में हमें ज्यादा विचार करने की जरूरत नहीं। उनका काम वो करें, हमारा काम हम कर रहे हैं। इससे हमें कोई नफा-नुकसान नहीं है।
प्रश्न : राजपूत समाज भाजपा का परम्परागत वोट बैंक रहा है। क्या मानवेन्द्र सिंह के कांग्रेस में जाने और आनंदपाल जैसे मुद्दों से कोई असर पड़ेगा?
- आनंदपाल मुद्दे पर भाजपा ने राजपूत समझौता समिति का गठन किया था। इसके पश्चात समाज के लोग संतुष्ट हो गए हैं। मानवेन्द्र सिंह ने निजी स्वार्थ के चलते पार्टी छोड़ी है। इस परिवार को पार्टी ने बहुत कुछ दिया है। इनके इस फैसले से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राजपूत समाज अब भी भाजपा के साथ है।
प्रश्न : जिलाध्यक्षों को चुनाव नहीं लड़ाने की बात कही थी, कई जिलाध्यक्ष टिकट की दौड़ में है, आपका भी नाम चर्चा में है?
- मैं कहीं से टिकट का दावेदार नहीं हूं। पार्टी ने यह तय किया था कि जिलाध्यक्ष चुनाव लड़ेंगे तो संगठन का कार्य प्रभावित होगा। इसलिए जहां जिलाध्यक्ष चुनाव लड़ेंगे, वहां उनके इस्तीफे ले लिए जाएंगे।

Published on:
22 Oct 2018 05:25 pm