
Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुदूर अंचलों में सुरक्षा बलों की लगातार सर्चिंग और बड़े माओवादी नेताओं के मारे जाने के बाद नक्सली संगठन हताश हो रहे हैं। पुलिस के बढ़ते दबाव और सरकार द्वारा तेज गति से कराए जा रहे विकास कार्यों के चलते नक्सलियों में आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति बढ़ने लगी है। इसी कड़ी में बुधवार को नारायणपुर जिले में 12 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
नारायणपुर पुलिस अधीक्षक रॉबिंसन गुरिया ने बताया कि अबूझमाड़ इलाके में सक्रिय इन 12 नक्सलियों में 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं। इन सभी पर कुल 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण की यह बड़ी कार्रवाई पुलिस की सतत रणनीति और क्षेत्र में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित करने का परिणाम है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया है। साथ ही उन्हें विश्वास दिलाया गया कि वे सरकारी पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाकर अपना जीवन सामान्य रूप से जी सकेंगे।
एसपी गुरिया ने कहा कि अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों की उपस्थिति और लगातार दबाव ने नक्सली संगठन को कमजोर कर दिया है। इस कारण बड़ी संख्या में माओवादी संगठन छोड़कर समाज की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नक्सली अब हिंसा छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं।
पुलिस का मानना है कि इस तरह के लगातार आत्मसमर्पण से न केवल क्षेत्र में शांति बहाल होगी, बल्कि स्थानीय लोगों में भी सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। यह कदम आने वाले समय में नारायणपुर जिले को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।