* मौसम (Mansoon) बदलने के साथ ही बाजार में मशरूम ( Mashroom) दिखने लगे हैं। फुटु जहा हमारे शरीर के लिए लाभकारी है वही इसे खाते समय कुछ सावधानियां ( Precautions) भी बरतने की जरुरत होती है। हमारे आसपास कई तरह के मशरूम ( Mashroom) मिलते हैं जिसमे कई जहरीले भी होते है जिससे हमे दूर रहना चाहिए ।
बस्तर। आम तौर पर सभी बाजार से सब्जियां और फल (fruits) खरीद कर इस्तेमाल करते है परन्तु समझदार और मेहनती वर्ग सब्जियों का उत्पादन शुरू कर दिया है। माना जाता है बाजार (Market) में आसानी से मिलने वाले वस्तुयो में आज कल पेस्टिसाइड और तमाम कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा रहा है इसके कारण सभी को कुछ सावधानियां बरतने की जरुरत है। मशरूम (फुटु) ग्रामीणों के साथ साथ शहरी क्षेत्रों में भी चाव से खाया जाता है और अधिक मात्रा में मिलने पर इसे सुखाकर रख दिया जाता है। बाजार में अभी फुटु के निकलने का शुरुआती दौर है इसलिए इसका रेट (Price) बहुत ज्यादा है।
मौसम (weather) के अनुसासर आज कल मशरूम भी बाजार में आने लगे हैं जिसमे बहुत सारे पोषक तत्व जैसे फाइबर, पोटेशियम, विटामिन सी, डी कैल्शियम और फास्फोरस आदि पाये जाते हैं जो फायदेमंद (Benifits) है। मशरूम की बहुत सारी प्रजातियां होती है जिनमे कुछ खाने लायक होती है और कुछ जहरीली भी होती हैं। जिनमें अंतर करना आसान नहीं होता ।
हमारी थोड़ी सी लापरवाही से यह मशरूम सेहत पर भारी भी पड़ सकता है । कई बार मशरूम के सेवन से एलर्जी, पेट में ऐंठन और दर्द, उल्टी दस्त, चक्कर, जी घबराना, बेहोशी आदि भोजन विषाक्तता के लक्षण भी देखने को मिलते हैं जो कई बार जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। इसलिए लोग फूटू खाएं जरूर लेकिन जरा सावधानी से और वर्षा ऋतु में वैसे भी हमें खान पान में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है ।
मशरूम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद लेकिन सावधानी जरूरी
इस संबंध में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी (Officer) डॉ योगेश विश्वकर्मा बताते हैं कुकुरमुत्ता (mushroom) एक प्रकार का कवक है जो बरसात (rainy season) के दिनों में सड़े गले पत्तों आदि की वजह से उग आते हैं इसे मशरूम भी कहते हैं। यह मृतोपजीवी है जो कि हरित लवक के अभाव के कारण अपना भोजन स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकता है।
डेंगुर मशरूम (फुटु) खाने में जायकेदार
बस्तर एक जंगल बहुल क्षेत्र है यहाँ बरसात के मौसम में जमीन और पुराने वृक्षों पर अनेक प्रकार के मशरूम उगते हैं जिन्हे यहाँ स्थानीय बोली में फुटु कहा जाता है। इसे यहाँ एक भोज्य पदार्थ के रूप में खाया जाता है। फुटु अनेक प्रकार के होते हैं यह माना जाता है कि वृक्षों (Plants) पर उगने वाले फुटु (mushroom) बेस्वाद और जहरीले भी होते हैं अत: खाने में उनका प्रयोग नहीं किया जाता। जमीन पर उगने वाले फुटु भी कई प्रकार के होते हैं जैसे डेंगुर फुटु, पान फुटु, हराडूला फुटु आदि। डेंगुर फुटु जो दीमक की बाम्बी के आस-पास उगता है सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । इसे अनेक प्रकार से पकाकर खाया जाता है।
बस्तर (Bastar) की तो बात ही निराली है। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही यहां का खान पान, रहन सहन और यहां मिलने वाली प्राकृतिक सब्जियों की तो बात ही अलग है । अंचल में लगातार झमाझम बारिश के बाद बोड़ा के साथ साथ अब फुटु भी दिखने लगा। बारिश (Rainy) के चलते अभी कृषि कार्य के साथ साथ आस पास जंगलों में गांव की महिलाएं एवं बच्चों को डेंगूर में फुटु खोजते हुए सहज ही देखा जा सकता है।
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ग्रामीण इसे 10 या 12 की संख्या में बंडल बांधकर 50 रू तक की दर से बेच रहे हैं। ग्रामीण बोड़ा और फुटू बेचकर अच्छी खासी रकम भी कमा रहे हैं। देशी मशरुम की बाजार में काफी मांग है। बाजार में आते ही इसे खरीदने लोगो की होड़ लग जाती है। कीमत की परवाह किए बिना जमकर फुटू की खरीददारी कर रहे हैं।
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