
Wildlife-Human Conflict: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पचमढ़ी में वन्यजीव गौर (इंडियन बाइसन) के हमले में भारतीय सेना के 17 कुमाऊं रेजिमेंट के जवान आकाश चौहान की मौत (Pachmarhi Army Jawan Death) ने लोगों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए है। पचमढ़ी में बाइसन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि की संभावना भी जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जंगल में अलग-अलग झुंडों के बीच दूरी बनाए रखने और भोजन-पानी की उपलब्धता जैसे कारणों से कुछ वन्यजीव जंगल के किनारे या आबादी के नजदीक ठहर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी आधिकारिक आंकड़े या वैज्ञानिक आकलन की पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग पचमढ़ी के एडिशनल डायरेक्टर संजीव शर्मा इस मामले और बाइसन के व्यवहार को लेकर पत्रिका से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बाइसन का स्वभाव कभी भी सामने से हमला करने वाला नहीं होता।
शर्मा ने बताया कि पहले बरसात के मौसम में बाइसन पचमढ़ी के आसपास दिखाई देते थे, लेकिन बारिश समाप्त होने के बाद वे वापस जंगल के अंदरूनी क्षेत्रों की ओर चले जाते थे। इस बार कुछ स्थानों पर उनकी मौजूदगी लंबे समय तक बने रहने की बात सामने आ रही है। बरसात के दौरान घास, पानी और जमीन की स्थिति वन्यजीवों की आवाजाही को प्रभावित कर सकती है।
वन्यजीवों की सुरक्षा और उन्हें शहर की ओर आने से रोकने के लिए विभाग सतर्क है। उन्होंने बताया कि पचमढ़ी और पिपरिया मार्ग सहित संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों की निगरानी के लिए 24 घंटे गश्त की व्यवस्था की गई है। अलग-अलग शिफ्ट में छह कर्मचारियों की टीम वाहन के माध्यम से निगरानी करती है।
पचमढ़ी में जंगली भैंसों का शहर की सीमा तक पहुंचना केवल नागरिक सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन से भी जुड़ा है। ऐसे में फेंसिंग की उपयोगिता, वन्यजीवों के पारंपरिक रास्तों और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। साथ ही, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को भी वन्यजीव दिखाई देने पर उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने और वन विभाग को तत्काल सूचना देने की जरूरत है।
अब सवाल यह है कि पचमढ़ी में वन्यजीवों की शहर की ओर बढ़ती आवाजाही के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और इसे रोकने के लिए निगरानी के साथ-साथ कौन-से दीर्घकालिक उपाय किए जाएंगे। समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है, ताकि पचमढ़ी के नागरिकों की सुरक्षा बनी रहे और वन्यजीव भी अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रह सकें।
संजीव शर्मा ने बाइसन के स्वभाव को लेकर एक ऐसा तथ्य भी सामने रखा जिसे 29 अक्टूबर को हुई घटना से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि बाइसन द्वारा इस तरह का हमला करना एक असामान्य घटना है। उन्होंने बताया कि बाइसन मनुष्यों से दूरी बनाकर रखता है और अमूमन सामने से हमला नहीं करता है। वह सामने से उकसाए जाने या खतरा महसूस किए जाने पर ही हमला करता है। वहीं, 30 अक्टूबर को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में घटना की जानकारी देते हुए बताया गया कि गौर के अचानक हमले में सेना के जवान की मृत्यु हुई थी।
हालांकि, संजीव शर्मा का यह भी कहना है कि हम वन्य जीवों को कितना भी अध्ययन कर ले उनके व्यवहार को जान ले लेकिन वह उनके सामने उत्पन्न हुई परिस्थिति में उनकी पारंपरिक स्वभाव जैसा व्यवहार करेंगे या कुछ नया यह हमेशा कहना मुश्किल रहेगा। उन्होंने बताया कि बाइसन झुंड में रहना पसंद करता है, जिसमें वयस्क नर अकेले भी विचरण करता है। सेना के कैंपस के अंदर जवान पर हमला करने वाला बाइसन भी अकेला बताया जा रहा था।