
रावण के पुतले के साथ कॉलोनी के बच्चे (फोटो सोर्स: Patrika)
Narmadapuram News : दशहरा यानी विजयादशमी पर्व को बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन के विशेष महत्व के तौर पर रावण का पुतला दहन कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में जेन-जी बच्चों ने इस परंपरा को एक अनोखा और प्रेरणादायक रूप दे दिया। पत्रिका के दशहरा विशेष संस्करण से प्रेरित होकर शहर के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले बच्चों ने रावण के 10 सिरों पर दस बुराइयों के नाम लिखे, इसके बाद उसका प्रतीकात्मक दहन कर समाज को एक खास संदेश दिया।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के श्रीराम हनुमान मंदिर के आस - पास रहने वाले बच्चों ने सबसे पहले तो खुद की पॉकेट मनी जोड़कर उससे सामान खरीदा और अपने हाथों से छोटे रावण का पुतला तैयार किया। इस रावण की सबसे खास बात ये थी कि, रावण के दस सिरों पर दस अलग - अलग विकारों के नाम लिखे गए थे। इनमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, हिंसा, आलस्य और छल शामिल थे। बच्चों ने इन बुराइयों को रावण के दस सिरों के प्रतीक के रूप में पेश किया। छोटी सी उम्र में बड़ा संदेश दे रहे बच्चों का उद्देश्य सिर्फ रावण का पुतला दहन करना नहीं था, बल्कि लोगों को अपने भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों और बुरी आदतों को खत्म करने के लिए प्रेरित करना था।
बच्चों का कहना है कि, पत्रिका के दशहरा विशेष संस्करण में रावण के दस सिरों को दस विकारों का प्रतीक बताते हुए प्रकाशित सामग्री पढ़कर उन्हें ये विचार आया। इस संस्करण को पढ़ने पर उन्हें समझ आया कि, सिर्फ रावण का पुतला जलाने से बुराइयों का अंत नहीं होगा, बल्कि हर व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद विकारों को भी दूर करने का प्रयास करना होगा।
आपको बता दें कि, कॉलोनी में रहने वाले वैभव रिछारिया, ऋषि दुबे, कुश यादव, आशू यादव, कृष्ण बारयानी, देवाशीष तिवारी, कृष्ण शर्मा, अक्षत यादव और आराध्य हरने समेत अन्य बच्चों ने मिलकर पहले तो अपनी - अपनी पॉकेट मनी कलेक्ट करके सामान खरीदा, फिर खुद पुतला तैयार किया। इस तरह इस पूर आयोजन को बच्चों ने अपनी सूझबूझ से सफल बना दिया।
कार्यक्रम में कॉलोनी के रहवासी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। बच्चों की रचनात्मक सोच और सामाजिक संदेश से प्रभावित होकर लोगों ने उनके प्रयास की खासा सराहना की। आयोजन के अंत में सभी ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। फिलहाल, बच्चों की ये पहल बताती है कि, त्योहारों का असल उद्देश्य सिर्फ परंपराओं को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके संदेश को अपने जीवन में उतारना भी है।
Updated on:
20 Oct 2026 08:23 pm
Published on:
20 Oct 2026 08:23 pm
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