जिले की वैध हो या अवैध खदानें हर जगह से जमकर रेत को मनमाने ढंग से निकाला जा रहा है,
ruined due to illegal mining नरसिंहपुर. जिले की छोटी-बड़ी सभी नदियां लंबे समय से अवैध खनन के कारण बर्बाद हो रही हैं, उनके अस्तित्व पर संकट बढ़ रहा है। जिले की वैध हो या अवैध खदानें हर जगह से जमकर रेत को मनमाने ढंग से निकाला जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग बेसुध है। सालीचौका क्षेत्र में आने वाली दुधी नदी के केसला घाट से रेत का अवैध खनन और परिवहन ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी बंद नहीं हो सका है। कहने को जिले में रेत खदाने लेने वाली कंपनी की चेक पोस्ट बनी हैं। लेकिन अवैध खदानों से रेत का निकलना और परिवहन होना बंया कर रहा है कि पूरा खेल विभाग और अवैध खननकर्ताओं की सांठगांठ से चल रहा है।
बताया जाता है कि जिले में खनिज विभाग से जो 36 खदानें स्वीकृत हैं उनका सीमांकन भी नियमों के अनुसार नहीं हो सका है। जिससे कितने रकबे और गहराई तक खनन किया जा सकता है इससे आमजन अंजान है। दुधी, शक्कर जैसी नदियों में जहां-जहां जलस्तर कम होता है वहां तक खनन करने के लिए मशीनों की आवाजाही बनी रहती है। रेत लेने वाहन भी खनन क्षेत्र तक पहुंचते हैं। केसला घाट जहां खदान भी स्वीकृत नहीं है वहां दिन रात खनन हो रहा है और मशीनों से रेत निकालकर नदी का सीना छलनी होते ग्रामीण खामोशी से देखने लाचार हैं। क्योंकि उनकी शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की है। शुक्रवार को भी दिनभर नदी से रेत निकालने का गोरखधंधा बेखौफ चलता रहा और डंपर-हाइवा रेत लेने दौड़ते रहे। यही हालत नर्मदा के ककराघाट पर रही, जहां वाहनों की आवाजाही बनी रही। वहीं खनिज अधिकारी ओपी बघेल से जब पूछा गया कि जिले में कितने चेक पोस्ट बने हैं और क्या कार्रवाई होती है तो उन्होंने यह कहते हुए बात खत्म कर दी कि उन्हें नहीं पता कितने चेक पोस्ट हैं।
खननकर्ताओं का डर इतना कि बोलने से कतराते हैं लोग
बताया जाता है कि खनिज विभाग ने जो खदाने स्वीकृत की हैं और जिनसे रेत निकाली जा रही है वहां तक आमजन का पहुंचना संभव नहीं होता। नियमों को धता बताकर होने वाले खनन की बात ग्रामीण खामोशी से स्वीकारते तो हैं लेकिन खननकर्ताओं के डर से कोई खुलकर बोलने तैयार नहीं रहता। लोग यह तो बताते हैं कि वैध खदानों में भी मशीनों से रेत निकालना आम बात है लेकिन यह सब उस वक्त अधिक होता है जब खदानों के आसपास क्षेत्र में लोगों की आवाजाही कम होती है। पोकलेन, जेसीबी के साथ ही अन्य संसाधन रेत निकालने के लिए आसपास मौजूद रहते हैं। जैसे-जैसे दुधी नदी का जलस्तर घटता जाएगा, मशीनों से खनन बढऩे लगेगा।
अवैध खनन रोकने में लाचार विभाग बताने लगा कार्रवाई
जिले में अवैध खनन-परिवहन रोकने में लाचार बना खनिज विभाग अब अपनी साख बचाने कार्रवाई के आंकड़े स्पष्ट कर रहा है। प्रभारी अधिकारी खनिज शाखा ने अपनी जारी जानकारी में बीते दिसंबर माह में 13 प्रकरण बनाने का दावा किया है जिसमें अवैध परिवहन के 11 व अवैध उत्खनन के मात्र दो प्रकरण बनाए हैं। जिसमें अवैध परिवहन के 11 प्रकरण में 15 लाख 62 हजार 700 रुपए की जुर्माना राशि अधिरोपित कर 14 लाख 67 हजार रुपए की राशि जमा कराना कहा है। वहीं अवैध उत्खनन के दो प्रकरणों में 86 हजार 250 रुपए की जुर्माना राशि अधिरोपित कर 60 हजार रुपए की राशि जमा कराना बताया है। हालांकि विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उक्त प्रकरण कहां बनाए और किनके खिलाफ प्रकरण दर्ज हुए।