11 साल का सोनू शनिवार को मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्या लेकर पहुंच गया। सोनू ने एक तरफ अपनी समस्या बताई तो दूसरी ओर उसकी बातों से सीएम के गृह जिले नालंदा की पोल भी खुल गई।
आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पत्नी की 16वीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर सीएम नीतीश कुमार शनिवार को नालंदा के हरनौत ब्लॉक स्थित अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचे। इस दौरान उत्क्रमित मध्य विद्यालय कल्याण बिगहा में जनसंवाद कार्यक्रम में लोगों की समस्या सुन रहे थे। लोगों से संवाद के दौरान एक बच्चे ने उनसे फरियाद लगायी कि वो पढ़ाई करना चाहता है लेकिन उसके पिता शराब में पैसा उड़ा देते हैं। इसलिए उसकी मदद की जाए।
जनसंवाद में अपनी जनसेवदना को लेकर एक 11 साल का बच्चा सोनू कुमार भी सीएम के पहुँच गया। उसके वहां पहुंचते ही मौजूद लोगों में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री जब लोगों से संवाद कर रहे थे उसी दौरान बच्चे ने अपना नाम सोनू कुमार बताया, वो सीएम को आवाज लगाने लगा। सर, सुनिये ना... सर सुनिये ना... जब मुख्यमंत्री ने बच्चे की आवाज सुनी तो ठहर गए। सोनू ने नीतीश कुमार से कहा कि वो पढ़ना चाहता है पर उसके अभिभावक पढ़ाते नहीं है। इसलिए सीएम से उसने इंतजाम कराने की गुहार लगायी।
सोनू मुख्य रूप से हरनौत प्रखंड के नीमा कौल गांव का रहने वाला है। उसके पिता रणविजय यादव दही की दुकान चलाकर घर चलाते हैं। सोनू कुमार ने जन संवाद में सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात कर कहा कि उसके पिता दही की दुकान से जो भी कमाते हैं उसका उपयोग शराब पीने में लगा देते हैं। इसके बाद जो सोनू ने कहा उसके बारे में न तो नीतीश कुमार सोचे होंगे, न ही वहां मौजूद अधिकारी।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आंखों में आंखे डालकर सोनू ने शिक्षा की बदहाली और शराबबंदी को असफल बताया, क्योंकि सीएम नीतीश कुमार लगातार हर भाषणों में शराबबंदी और शिक्षा के बारे में कहते नहीं थकते हैं। बच्चे ने कहा कि अगर सरकार हमें मदद करें तो मैं भी पढ़ लिखकर आईएएस या आईपीएस बनना चाहता हूं। बच्चे ने कहा कि सरकारी स्कूल में शिक्षा की स्थिति बद से बदतर है।
बच्चे की काबिलियत इसी से झलकती है कि सोनू कुमार छठी कक्षा में पढ़कर 5वीं कक्षा तक के 40 बच्चों को शिक्षा देकर अपनी पढ़ाई का खर्च निकालता है। वहीं इस छोटे से बच्चे की हिम्मत को देखकर अधिकारी से लेकर नेता तक दंग रह गए। बच्चे की फरियाद सुन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चे की समस्या का हल हो।
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