
Hafiz Sayeed: 26/11 के उस भयानक खौफनाक मंजर को भारत कभी नहीं भूल सकता, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इस भीषण आतंकी हमले के करीब 18 साल बाद भारत की जांच एजेंसियों और मुंबई पुलिस ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। लश्कर-ए-तैयबा के आका हाफिज सईद समेत 6 प्रमुख पाकिस्तानी साजिशकर्ताओं के खिलाफ अब उनकी गैरहाजिरी में मुकादमा चलाया जाएगा।
पाकिस्तान में छिपे बैठे ये 6 आतंकी कभी भारतीय अदालत के सामने पेश नहीं हुए। इसलिए अब कानून के जरिए इन पर शिकंजा कसा जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अल-कामा, आसिम उर्फ अबू कहाफा और मेजर अब्दुल रहमान पाशा शामिल हैं। विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम जल्द ही इस मामले में अदालत के समक्ष घोषणा रिपोर्ट जमा करेंगे, जिसके बाद इन सभी भगोड़ों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।
अब तक ये आतंकी पाकिस्तान की आड़ लेकर भारतीय कानून से लगातार बचते आ रहे थे। हालांकि, भारतीय कानून में हुए नए संशोधनों के तहत अब किसी आरोपी के फरार रहने पर भी उसके खिलाफ अदालत में केस चलाकर फैसला सुनाया जा सकता है। यदि इस मुकदमे में ये सभी छह आरोपी दोषी पाए जाते हैं, तो भविष्य में जैसे ही वे भारत की हिरासत में आएंगे, उन्हें बिना किसी कानूनी देरी के तुरंत सजा दी जाएगी। इससे पहले जम्मू की एक अदालत ने भी पहलगाम आतंकी हमले के मामले में एनआईए (NIA) की चार्जशीट के आधार पर हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
नवंबर 2008 में समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसे 10 आतंकियों ने ताज महल पैलेस होटल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST), ओबेरॉय ट्राइडेंट, लियोपोल्ड कैफे और नरीमन हाउस जैसे प्रमुख स्थलों को निशाना बनाया था। चार दिनों तक चले इस हमले में 166 बेगुनाह लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस भयावह घटना के बाद भारत ने अपनी तटीय सुरक्षा, खुफिया तंत्र और आतंकवाद-रोधी रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया।