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JPSC Exam Cancellation: 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज

JPSC Exam Cancellation: झारखंड में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा, नियुक्ति और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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भारत

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Harshul Mehra

Aug 21, 2026

minister dilip jaiswal

दिलीप जायसवाल (फोटो- Dilip Jaiswal X)

JPSC Exam Cancellation: झारखंड में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार और झारखंड के नेताओं ने अपने-अपने रुख सामने रखे हैं।

राज्य सरकार ने छात्र आंदोलन और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी व पेपर लीक के आरोपों के बाद इन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। हालांकि, नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों ने सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गुरुवार को सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी।

छात्रों के आंदोलन के बाद लिया गया था परीक्षा रद्द करने का फैसला

झारखंड सरकार ने छात्र आंदोलन और परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच 11वीं से 13वीं जेपीएससी समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश जारी किया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ उन अभ्यर्थियों ने अदालत का रुख किया, जिनकी नियुक्तियां परीक्षा के बाद हो चुकी थीं। उनका तर्क था कि परीक्षा रद्द किए जाने से उनकी नियुक्तियों पर असर पड़ रहा है।

दिलीप जायसवाल बोले- गड़बड़ी की विस्तृत जांच जरूरी

पटना में बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार को महसूस हुआ था कि जिन परीक्षाओं का आयोजन हुआ, उनमें गड़बड़ी की शिकायतें हैं और उनकी विस्तृत जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अदालत पहले यह समझना चाहती है कि परीक्षाओं को रद्द करने के पीछे सरकार का समुचित आधार क्या था। इसी वजह से फिलहाल सरकार के फैसले पर रोक लगाई गई है।

राजीव रंजन ने बताया न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा

जदयू नेता राजीव रंजन ने हाईकोर्ट के आदेश को न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई अभी जारी रहेगी और अदालत सभी पक्षों की बात सुनेगी। राजीव रंजन के मुताबिक, छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। लेकिन अब जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। ऐसे में उनकी बात सुना जाना भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

नीरज कुमार ने हेमंत सोरेन सरकार पर साधा निशाना

जदयू एमएलसी और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मुद्दे को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने नौजवानों की पीड़ा को नहीं समझा और छात्र आंदोलन के दबाव में परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया। नीरज कुमार ने कहा कि भले ही हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, लेकिन उनके मुताबिक इस पूरे मामले ने हेमंत सोरेन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उदित राज ने किया हेमंत सोरेन सरकार का बचाव

दूसरी ओर, दिल्ली में कांग्रेस नेता उदित राज ने हेमंत सोरेन सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्र आंदोलन के दौरान सरकार ने संवेदनशीलता के साथ काम किया था। उदित राज ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों की मांगों को लेकर हेमंत सोरेन को पत्र लिखा था। उनके मुताबिक, सरकार ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए जेएसएससी-सीजीएल समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था।

'हाईकोर्ट के स्टे में हेमंत सोरेन सरकार का दोष नहीं'

उदित राज ने कहा कि अब हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई है, लेकिन इसमें हेमंत सोरेन सरकार का कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उस समय छात्रों की मांगों और आंदोलन को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया था और अब अदालत इस मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है।

नियुक्त हो चुके अभ्यर्थियों ने दी थी चुनौती

दरअसल, झारखंड सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले से उन अभ्यर्थियों पर भी असर पड़ा, जिनकी नियुक्तियां प्रक्रिया पूरी होने के बाद हो चुकी थीं। इन अभ्यर्थियों ने सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले और उससे प्रभावित पक्षों के तर्कों पर विचार किया जाएगा।

परीक्षा रद्द करने के फैसले से बढ़ी सियासी बहस

हाईकोर्ट की रोक के बाद झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। एक ओर विपक्षी नेता सरकार पर छात्रों और युवाओं की समस्याओं को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं कांग्रेस की ओर से सरकार के फैसले का बचाव किया जा रहा है। फिलहाल अदालत की अंतरिम रोक के बाद 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।