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‘पिता के निधन के बाद आज पहली बार मुस्कुराया हूं’, अब्दुल बोला- सरकारी स्कूलों के लिए और काम करो

Abhijeet Dipke: महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने का संकल्प और अब्दुल की भावुक कहानी। जानिए कैसे एक बेटे ने पिता के निधन के बाद भी बच्चों की पढ़ाई के लिए आवाज उठाई। पढ़ें पूरी खबर...
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school infrastructure, social impact

जनाब माफिक, शेख अब्दुल हाफिज और अभिजीत दीपके। फोटो- (X- @abhijeet_dipke)

Abdul Father Death: महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए प्रशासन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई की खबर के बीच एक ऐसी भावुक तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर दिया है। पिता के निधन के गहरे सदमे से गुजर रहे अब्दुल नाम के एक युवक ने जब स्कूलों में सुधार की खबर सुनी, तो उसकी आंखों में आंसू छलक आए। उसने रुंधी आवाज में कहा कि पिताजी के निधन के बाद पहली बार आज मैं मुस्कुरा पाया हूं।

घर का हाल पूछने के लिए आया था फोन

दरअसल, अब्दुल के पिता के जाने के बाद उसका और उसके परिवार का हालचाल जानने के लिए उसे अभिजीत दीपके ने फोन किया गया था। उम्मीद थी कि बातचीत उसके घर-परिवार को लेकर होगी। लेकिन अब्दुल ने अपनी परेशानी बताने के बजाय पूरी बात सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने पर ही मोड़ दी।

'हमारी चिंता छोड़ो, बस और स्कूल ठीक करने हैं'

बातचीत के दौरान जब उससे बार-बार पूछा गया कि अब्दुल, तुम कैसे हो? तुम्हारी मां कैसी हैं? तो उसने हर बार अपनी बात को बीच में रोकते हुए सिर्फ एक ही बात कही कि आप हमारी चिंता छोड़ो। आप बस और स्कूलों में जाओ, उनका जायजा लो। हमें और स्कूलों की हालत सुधारनी है।

अब भाई ने बोला है करने का, तो करने का

अपने सबसे बड़े दुख के वक्त भी अब्दुल को सिर्फ गरीब बच्चों की पढ़ाई और उनके स्कूलों की फिक्र थी। उसकी इसी निस्वार्थ सोच ने इस मुहिम को और मजबूत बना दिया है। अब्दुल की इस बात से साफ है कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का काम अब रुकने वाला नहीं है। जैसा कि अब्दुल ने कहा अब भाई ने बोला है करने का, तो करने का।

अब्दुल वोट मांगने नहीं, स्कूल ठीक कराने गया था

आशुतोष रांका ने कहा कि यह सिर्फ CJP की जिम्मेदारी नहीं है। देश में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति के साथ उनका संगठन खड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब्दुल स्कूल ठीक कराने की बात करने गया था लेकिन उसके साथ मारपीट की गई। रांका ने कहा, कि अब्दुल वोट मांगने तो नहीं गया था। अब्दुल स्कूल ठीक कराने की बात करने गया था।

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