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पुणे: BJP-NCP में बढ़ी तकरार, वरिष्ठ मंत्री के कामकाज की जांच की मांग, दो पार्षदों की विकास निधि ‘शून्य’

BJP NCP Conflict: पुणे में भाजपा और सुनेत्रा पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच खींचतान बढ़ गई है। दो एनसीपी नगरसेवकों (पार्षद) का विकास निधि भी शून्य किया गया है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 21, 2026

Pune BJP NCP Conflict

मंत्री चंद्रकांत पाटील और सीएम देवेंद्र फडणवीस (Photo: IANS)

NCP on Chandrakant Patil: महाराष्ट्र में भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सुनेत्रा पवार गुट) के बीच जारी खींचतान अब चरम पर पहुंच गया है। अमोल बालवडकर के बाद अब एनसीपी के नगरसेवक (पार्षद) सुहास टिंगरे का विकास निधि भी कथित तौर पर शून्य कर दिया गया है। दोनों नगरसेवकों ने भाजपा नेता और मंत्री चंद्रकांत पाटील के कामकाज का ऑडिट कराने की मांग को लेकर प्रस्ताव दिया था। इसी के बाद विकास निधि रोके जाने को लेकर सत्तारूढ़ महायुति के भीतर टेंशन बढ़ गई है।

एनसीपी सुनेत्रा पवार गुट के नेता सुहास टिंगरे ने आशंका जताई है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटील के कामों की जांच की मांग वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने की वजह से उनका विकास निधि शून्य किया गया है। भाजपा ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

'मुझे भी यही संभावना लगती है'

सुहास टिंगरे ने कहा कि एनसीपी पार्षद अमोल बालवडकर ने मंत्री चंद्रकांत पाटील के कामों की जांच कराने की मांग की थी और उन्होंने उस प्रस्ताव का अनुमोदन किया था। इसके बाद उनका विकास निधि शून्य किया गया है। इस सवाल पर उन्होंने कहा, "मुझे भी यही संभावना लगती है।"

टिंगरे ने कहा कि उनका किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं है, लेकिन अगर किसी को उनसे व्यक्तिगत नाराजगी है तो उसका खामियाजा उनके क्षेत्र के लोगों को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें मिलने वाले करीब 12 करोड़ रुपये के विकास निधि से आम लोगों के लिए काम किए जाने थे, जबकि उनके वार्ड में कई विकास कार्य अभी भी लंबित हैं।

'अजित पवार ने कभी किसी का एक रुपया भी नहीं रोका'

सुहास टिंगरे ने दिवंगत नेता अजित पवार का उदाहरण देते हुए कहा कि अजित पवार ने कई वर्षों तक राज्य के वित्त मंत्री के रूप में काम किया और पुणे के संरक्षक मंत्री भी रहे। उनके कार्यकाल में भी उन पर कई तरह के आरोप लगाए गए थे, यहां तक कि 70 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप भी लगाया गया था। लेकिन इन आरोपों के बावजूद अजित पवार ने कभी किसी विधायक या सांसद का एक रुपया भी विकास निधि नहीं रोका। उन्होंने कहा कि अगर उनके साथ व्यक्तिगत नाराजगी है तो वह अलग बात है, लेकिन विकास निधि रोकने से उनके क्षेत्र के आम लोगों के विकास कार्य प्रभावित होंगे।

पुणे मनपा में भाजपा और एनसीपी आमने-सामने

सुहास टिंगरे ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य और केंद्र में भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की गठबंधन वाली सरकार है, लेकिन पुणे महानगरपालिका (PMC) में उनकी पार्टी विपक्ष की भूमिका में है। इसलिए वह विपक्ष के तौर पर सवाल उठा रहे है, जो कि स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि गठबंधन का मतलब यह नहीं है कि विपक्ष में रहते हुए उनकी पार्टी सवाल नहीं पूछ सकती। विकास कार्यों और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाना उनका अधिकार है।

गौरतलब हो कि पीएमसी में यह विवाद उस समय और गहरा गया जब उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की एनसीपी के नगरसेवक अमोल बालवडकर का विकास निधि रोक दिया गया। अब सुहास टिंगरे के निधि को भी शून्य किए जाने से महायुति के दोनों सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। हालांकि, विकास निधि शून्य किए जाने के पीछे का आधिकारिक कारण क्या है? इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

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