
Protest in Delhi: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने दिल्ली पुलिस के उन दावों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने के शर्त वाले बांड पर रिहा किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने रविवार को जानकारी दी थी कि दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 50,000 रुपए के श्योरिटी बॉन्ड (Surety Bond) पर रिहा किया गया और एक साल तक शांति व सदाचार बनाए रखने की शर्त रखी गई।
रिहाई के ठीक बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिल्ली पुलिस के दावों को नकारते हुए लिखा, 'हमने ऐसा कोई बांड साइन नहीं किया है जो हमें विरोध प्रदर्शन करने से रोके। हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
पुलिस की हिरासत से रिहा होने के कुछ घंटों बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने 11 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
दास ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान CJP नेताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने दावा किया कि बिना उचित कागजी कार्रवाई के उनके मोबाइल फोन जबरन जब्त कर लिए गए और उन्हें वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि पुलिस हिरासत के दौरान उनके फोन हैक, क्लोन या एक्सेस किए जा सकते हैं। इन आशंकाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। आम प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए व्यवहार पर सवाल उठाते हुए, दास ने पूछा कि अगर CJP नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी न होती तो नागरिकों का क्या होता।
CJP के नेता सौरव दास ने आरोप लगाए कि, जब मोदी-शाह ने दिल्ली को एक किले में बदल दिया और अपने ही नागरिकों के खिलाफ एक तरह से जंग छेड़ दी, तो एक बात बिल्कुल साफ हो गई, इस सरकार के टिके रहने में ज्ञानेश कुमार की भूमिका सबसे अहम है।
नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल पर जिस तरह से ताकत का बेतहाशा इस्तेमाल किया गया, उन्हें डराया-धमकाया गया, उसने सरकार की असलियत सबके सामने ला दी है। लेकिन हम युवा पीढ़ी जवाबदेही की मांग करती रहेगी। हम न तो डरेंगे और न ही चुप बैठेंगे।
हम पीछे नहीं हट रहे हैं। हम पूरी ताकत के साथ वापसी कर रहे हैं!